धर्म-अध्यात्म

मां दुर्गा का आगमन शुभ, लेकिन विदाई की सवारी क्यों बढ़ा रही चिंता?

nidhi
12 Oct 2026 12:17 PM IST
मां दुर्गा का आगमन शुभ, लेकिन विदाई की सवारी क्यों बढ़ा रही चिंता?
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मां दुर्गा की विदाई मुर्गे पर क्यों?

शारदीय नवरात्र 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर साल मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी पर आती हैं और नवरात्र के समापन पर किसी वाहन से प्रस्थान करती हैं। देवी के आगमन और प्रस्थान के वाहन को लेकर ज्योतिषीय परंपराओं में अलग-अलग संकेत बताए गए हैं।

इस साल मां दुर्गा के आगमन को सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि उनके प्रस्थान के वाहन को लेकर कुछ धार्मिक मान्यताओं में चिंता जताई जाती है। हालांकि, ये संकेत पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें भविष्य की निश्चित घटनाओं की भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।
11 अक्टूबर से शुरू हुआ शारदीय नवरात्र
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से हुई है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाएगी। 19 अक्टूबर को महानवमी और 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।
हाथी पर मां दुर्गा का आगमन क्यों माना जाता है शुभ?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, जब नवरात्र का आरंभ रविवार या सोमवार को होता है, तो मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जाता है। इस वर्ष नवरात्र रविवार से शुरू हुआ है, इसलिए माता का आगमन वाहन हाथी बताया गया है।
हाथी को समृद्धि, अच्छी वर्षा, उन्नति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी पर देवी का आगमन कृषि और जनजीवन के लिए शुभ संकेत माना गया है। अच्छी वर्षा से फसलों को लाभ और समाज में सुख-समृद्धि की कामना इस मान्यता से जुड़ी हुई है।
मुर्गे पर होगी मां दुर्गा की विदाई
इस वर्ष विजयादशमी मंगलवार को पड़ रही है। प्रचलित पंचांग परंपरा के अनुसार, मंगलवार या शनिवार को देवी का प्रस्थान होने पर उनका वाहन कुक्कुट यानी मुर्गा माना जाता है।
इसी आधार पर शारदीय नवरात्र 2026 में मां दुर्गा की विदाई मुर्गे पर होने की मान्यता है। कुछ धार्मिक ग्रंथों की पारंपरिक व्याख्याओं में इस वाहन को अशुभ संकेतों से जोड़ा जाता है।
विदाई के वाहन को लेकर चिंता क्यों?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुक्कुट पर देवी का प्रस्थान सामाजिक अशांति, अस्थिरता और चुनौतियों का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस बार मां दुर्गा के शुभ आगमन के साथ उनके प्रस्थान के वाहन की चर्चा भी हो रही है।
हालांकि, इन धार्मिक संकेतों का अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में कोई अनिष्ट घटना निश्चित रूप से होगी। ये पारंपरिक प्रतीकात्मक व्याख्याएं हैं, जिनका वैज्ञानिक रूप से भविष्यवाणी के रूप में प्रमाण नहीं है।
मां दुर्गा का स्थायी वाहन सिंह, फिर अलग-अलग सवारी क्यों?
धार्मिक चित्रों और कथाओं में मां दुर्गा का मुख्य वाहन सिंह है। लेकिन नवरात्र के दौरान देवी के आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग वाहनों की परंपरा प्रचलित है।
इनमें हाथी, घोड़ा, पालकी, नौका और कुक्कुट जैसे वाहनों का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, नवरात्र के आरंभ और समापन के वार से इन वाहनों का निर्धारण किया जाता है। प्रत्येक वाहन के साथ अलग-अलग शुभ-अशुभ संकेत जुड़े हुए हैं।
नवरात्र में भक्त क्या करें?
नवरात्र का मुख्य उद्देश्य मां दुर्गा की आराधना, आत्मसंयम और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाना है। श्रद्धालु इन दिनों अपनी परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और देवी के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं।
मां के प्रस्थान वाहन को लेकर भयभीत होने के बजाय श्रद्धालु पूजा-अर्चना, सेवा, दान और सकारात्मक विचारों पर ध्यान दे सकते हैं। धार्मिक परंपरा में सच्ची श्रद्धा और भक्ति को विशेष महत्व दिया गया है।
इस प्रकार शारदीय नवरात्र 2026 में हाथी पर मां दुर्गा का आगमन सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जा रहा है, जबकि मुर्गे पर प्रस्थान को पारंपरिक मान्यताओं में सावधानी और चुनौतियों के संकेत से जोड़ा गया है।
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