- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- Gita का संदेश: अधर्म...
धर्म-अध्यात्म
Gita का संदेश: अधर्म की राह पर सही-गलत का भेद है खो जाता
Harrison
7 Nov 2025 7:29 PM IST

x
Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म: भगवद गीता, भारतीय दर्शन और धर्म का अद्वितीय ग्रंथ, जीवन और नैतिकता के मार्ग को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्धभूमि में दिए अपने उपदेशों के माध्यम से अधर्म और धर्म के बीच का फर्क समझाया। गीता का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है और इसे केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि जीवन जीने की सच्ची पद्धति के रूप में अपनाया जा सकता है।
गीता के अनुसार, अधर्म की राह पर चलने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे सही और गलत के बीच का भेद खो देता है। वह अपने स्वार्थ, लालच या अहंकार के प्रभाव में आकर ऐसे निर्णय लेने लगता है जो नैतिकता और न्याय के विरुद्ध होते हैं। श्रीकृष्ण ने स्पष्ट किया कि धर्म केवल पूजा, अनुष्ठान या कर्मकांड नहीं है। असली धर्म वह है जो जीवन के हर क्षेत्र में नैतिकता, ईमानदारी और सत्य के मार्ग को अपनाए।
श्रीकृष्ण का उपदेश बताता है कि जब व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलता है, तब वह केवल अपने लिए नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी सही निर्णय ले सकता है। अधर्म में उलझा व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ या तत्कालिक लाभ के पीछे भागता है और परिणामस्वरूप अपने जीवन में अस्थिरता, मानसिक उलझन और नैतिक पतन का सामना करता है। गीता में यह भी कहा गया है कि धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति सही-गलत का स्पष्ट भेद समझता है और उसके निर्णय समाज और आत्मा दोनों के कल्याण के लिए होते हैं।
भगवद गीता का यह संदेश वर्तमान समय में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज की दुनिया में जब लोग सिर्फ व्यक्तिगत लाभ, शक्ति या प्रसिद्धि के पीछे भाग रहे हैं, तब अधर्म की राह पर चलना सामान्य हो गया है। ऐसे में गीता की शिक्षाएँ हमें याद दिलाती हैं कि केवल बाहरी पूजा या दिखावटी धार्मिक कर्म ही पर्याप्त नहीं हैं। सच्चा धर्म वह है जो हमारे विचारों, कार्यों और निर्णयों में नैतिकता और न्याय को प्रकट करे।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया कि जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करते समय भी सही और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना आवश्यक है। यदि व्यक्ति अधर्म की राह अपनाता है, तो उसके लिए सही और गलत का भेद करना कठिन हो जाता है, और वह धीरे-धीरे आत्मा और समाज दोनों के लिए हानिकारक बन जाता है। इसलिए गीता हमें यह शिक्षा देती है कि धर्म का पालन करना केवल कर्मकांड या पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि हर निर्णय और व्यवहार में नैतिकता का पालन करना जरूरी है।
गीता के उपदेश आधुनिक जीवन में नैतिक मार्गदर्शन का स्त्रोत हैं। चाहे वह राजनीति, व्यापार, शिक्षा या व्यक्तिगत जीवन हो, सही और गलत के बीच निर्णय करने की क्षमता धर्म और नैतिकता पर आधारित होती है। अधर्म में उलझा व्यक्ति अक्सर असफल और मानसिक तनाव में डूबा रहता है, जबकि धर्म का मार्ग अपनाने वाला व्यक्ति स्थिर, संतुलित और समाजोपयोगी बनता है।
श्रीकृष्ण का यह संदेश स्पष्ट करता है कि धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन का नैतिक और सच्चा मार्ग है। जब लोग धर्म के मार्ग पर चलेंगे, तब वे न केवल अपने जीवन को सुदृढ़ बनाएंगे बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी लाभकारी निर्णय लेंगे। अधर्म की राह पर चलने वाला व्यक्ति अक्सर भ्रम और अंधकार में फंस जाता है, लेकिन धर्म और नैतिकता का पालन करने वाला व्यक्ति अपने जीवन में स्पष्टता, संतुलन और सफलता प्राप्त करता है।
गीता का यह उपदेश आज के समय में हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें याद दिलाता है कि केवल बाहरी पूजा और कर्मकांड से नहीं, बल्कि सही विचार और नैतिक निर्णय से ही जीवन में सच्चा धर्म स्थापित होता है।
Tagsगीताअधर्मराह सही-गलतभेदGitaunrighteousnessright and wrong pathdiscriminationजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newsSamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





