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धर्म-अध्यात्म
Scorpio Sankranti पर सूर्य पूजा से पितरों की कृपा प्राप्त करें
Harrison
12 Nov 2025 7:35 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : वृश्चिक संक्रांति का दिन हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह वह समय होता है जब सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं और अपने शुभ प्रभाव से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से न केवल स्वास्थ्य, धन और सुख में वृद्धि होती है, बल्कि पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा भी प्राप्त होती है।
वृश्चिक संक्रांति के अवसर पर विशेष विधि और अनुष्ठानों के माध्यम से सूर्य देव की उपासना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन सूर्योदय के समय उठकर स्नान-ध्यान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देने के लिए साफ और स्वच्छ जल का उपयोग करना चाहिए। इस जल में तुलसी के पत्ते, चंदन, केसर या हल्दी मिलाकर अर्घ्य देने की परंपरा भी प्रचलित है।
सूर्य देव की पूजा के समय लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान "ॐ सूर्याय नमः" या "सूर्य मंत्र" का जाप करने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही सूर्य देव के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक जलाना और लाल पुष्प अर्पित करना अत्यंत फलदायी होता है।
वृश्चिक संक्रांति के दिन पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि पितरों की पूजा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में समृद्धि आती है। पितरों के लिए तर्पण या श्राद्ध कर्म करना चाहिए, जिसमें जल, धान और कच्चा नमक अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, गाय के दूध, हवन सामग्री या तिल का दान करने से पितरों की आत्मा की शांति होती है और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।
विशेषकर वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य और पितरों की पूजा एक साथ करने का महत्व अधिक बढ़ जाता है। इस दिन विशेष रूप से सूर्य और पितरों को अर्घ्य देने के लिए जल में तिल मिलाकर देना अत्यंत शुभ होता है। इस अनुष्ठान से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि परिवार के सदस्यों पर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने से मानसिक तनाव कम होता है, नेत्र रोगों में लाभ मिलता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही, परिवार में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
सूर्य देव और पितरों की पूजा के अलावा इस दिन धार्मिक पुस्तक का पाठ करना, ब्राह्मण को भोजन कराना या गरीबों को दान देना भी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति के कर्म अच्छे होते हैं और उसकी आत्मा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इस प्रकार, वृश्चिक संक्रांति का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सूर्य देव की उपासना और पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। इस दिन किए गए अनुष्ठान पूरे वर्ष के लिए शुभ फल प्रदान करते हैं और व्यक्ति को स्वास्थ्य, धन और पितृ कृपा से संपन्न करते हैं।
वृश्चिक संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा और पितरों की श्रद्धा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह दिन अपने आध्यात्मिक महत्व और शुभ अनुष्ठानों के कारण विशेष रूप से फलदायी है। इस अवसर पर पूजा विधि का पालन करने से न केवल धार्मिक कर्तव्य पूर्ण होता है, बल्कि परिवार और समाज में समृद्धि और शांति भी बनी रहती है।
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