धर्म-अध्यात्म

Garuda Purana: मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए जरूरी गरुड़ पुराण का पाठ, मिलता है कर्म सुधारने का मौका मिलता

Tulsi Rao
15 Sep 2021 8:02 AM GMT
Garuda Purana: मृत्यु के बाद आत्मा की शांति के लिए जरूरी गरुड़ पुराण का पाठ, मिलता है कर्म सुधारने का मौका मिलता
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गरुड़ पुराण सिर्फ मृत्यु और मृत्यु के बाद की स्थितियों का ही वर्णन नहीं करता, इसमें कुल उन्नीस हजार श्लोक हैं, जिनमें से सात हजार श्लोक में ज्ञान, धर्म, नीति, स्वर्ग, नर्क और व्यावहारिक जीवन की तमाम बातें बताई गईं हैं. ​जो लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं. यहां विस्तार से जानिए किसी की मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण के पाठ कराने का उद्देश्य क्या है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। सनातन धर्म में किसी की मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण का पाठ करवाने का चलन है. मान्यता है कि गरुड़ पुराण के पाठ से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है और वो मृत्यु के बाद भी सद्गति को प्राप्त करता है. वहीं उसके परिजनों को जीवन में सही तरह से कर्म करने की प्रेरणा मिलती है.

बता दें कि गरुड़ पुराण सिर्फ मृत्यु और मृत्यु के बाद की स्थितियों का ही वर्णन नहीं करता, इसमें कुल उन्नीस हजार श्लोक हैं, जिनमें से सात हजार श्लोक में ज्ञान, धर्म, नीति, स्वर्ग, नर्क और व्यावहारिक जीवन की तमाम बातें बताई गईं हैं. ​जो लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं. यहां विस्तार से जानिए किसी की मृत्यु के बाद गरुड़ पुराण के पाठ कराने का उद्देश्य क्या है.
मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति
गरुड़ पुराण के मुताबिक मरने के बाद व्यक्ति की आत्मा 13 दिनों तक अपने ही घर में परिजनों के बीच रहती है. ऐसे में यदि उस आत्मा को गरुड़ पुराण को श्रवण करने का मौका मिले तो उसे शांति मिलती है और भटकना नहीं पड़ता. मान्यता है कि ऐसे में मृत व्यक्ति की आत्मा आसानी से अपनों से मोह को त्याग पाती है क्योंकि उसे मुक्ति का मार्ग पता चल जाता है. इसके बाद वो सारे संताप भूलकर सद्गति को प्राप्त होती है. ऐसे में या तो वो पितरलोक में चली जाती है या उसे दूसरा जन्म मिल जाता है.
परिजनों को मिलता ज्ञान
इस महापुराण भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्म की महत्ता को भी बताया गया है. ऐसे में इसका पाठ सुनने के ​बाद मृत व्यक्ति के परिजनों को जीवन को धर्म पूर्वक जीने के नियम और तरीकों के बारे में पता चल जाता है. साथ ही कर्मों के आधार पर आत्मा की यात्रा के बारे में पूरा ज्ञान हो जाता है. सभी बातो को जानने के बाद वो अपने जीवन को सुधार सकता है.
कर्म सुधारने का मौका मिलता
जो हो गया, उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन आने वाले समय को हम अपने आज के कर्मों के प्रभाव से जरूर बदल सकते हैं. गरुड़ पुराण सुनने के बाद मृतक के परिजन सही और गलत का फर्क जान लेते हैं. ऐसे में वे इन बातों को याद करके अपने भविष्य और मृत्यु के बाद उच्च लोकों को प्राप्त करने की कोशिशों में जुट जाते हैं. इसी के साथ उनके कर्मों में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.


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