धर्म-अध्यात्म

गरुड़ पुराण: क्या मृत व्यक्ति के कपड़े घर में रखने चाहिए? जानें शास्त्रों की राय

nidhi
20 Jun 2026 3:21 PM IST
गरुड़ पुराण: क्या मृत व्यक्ति के कपड़े घर में रखने चाहिए? जानें शास्त्रों की राय
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मृत्यु के बाद कपड़ों को लेकर क्या है धार्मिक दृष्टिकोण
Garud Puran: हिंदू धर्म के 18 महापुराणों में गरुड़ पुराण का विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है. जहाँ अन्य धार्मिक ग्रंथ मनुष्य को जीवन जीने की कला और धर्म के मार्ग का ज्ञान देते हैं, वहीं गरुड़ पुराण में मृत्यु, परलोक, आत्मा की यात्रा और मृत्यु के बाद होने वाली विभिन्न अवस्थाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है. साथ ही, इसमें यह भी बताया गया है कि किसी परिजन के निधन के बाद उनकी निजी वस्तुओं, विशेषकर कपड़ों, के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए. अक्सर लोग अपने प्रियजन की यादों को संजोकर रखने के लिए उनके कपड़े अलमारी में सुरक्षित रख देते हैं या स्वयं उनका उपयोग करने लगते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस विषय में गरुड़ पुराण और शास्त्रों में क्या निर्देश दिए गए हैं.
मृतक के कपड़े घर में रखने चाहिए या नहीं?
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति के कपड़ों को लंबे समय तक घर में संभालकर रखना या उनका इस्तेमाल करना शुभ नहीं माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, जब तक व्यक्ति जीवित रहता है, उसके द्वारा रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं में उसकी सूक्ष्म ऊर्जा समाहित हो जाती है. कपड़ों का संबंध सीधे शरीर से होता है, इसलिए इनमें मृत व्यक्ति की ऊर्जा और उनका सांसारिक मोह सबसे लंबे समय तक बना रहता है.
मृतक कपड़ों का इस्तेमाल करने से क्या हो सकता है?
आत्मा का मोह: मृत्यु के बाद भी आत्मा आसानी से सांसारिक बंधनों को नहीं छोड़ पाती. यदि परिवार का कोई सदस्य उनके कपड़ों को पहनता है या बार-बार देखता है, तो आत्मा का मोह उस व्यक्ति और घर के प्रति बना रहता है, जिससे उसे मोक्ष की राह में बाधा आती है.
मानसिक और शारीरिक प्रभाव: मृतक की ऊर्जा से जुड़े कपड़े पहनने से जीवित व्यक्ति के मन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. व्यक्ति उदासी, मानसिक तनाव, डरावने सपने या अज्ञात भय का शिकार हो सकता है.
पितृ दोष की संभावना: शास्त्रों के अनुसार, मृतक की वस्तुओं का गलत तरीके से रखरखाव करने या उनके नियमों की अनदेखी करने से घर में नकारात्मकता बढ़ती है और पितृ नाराज हो सकते हैं.
मृतक के कपड़ों का क्या करें?
मृतक के कपड़ों को घर में रखने या फेंकने के बजाय किसी जरूरतमंद व्यक्ति को सम्मानपूर्वक दान कर देना चाहिए. जब कोई जरूरतमंद उन कपड़ों को पाकर सुखी होता है, तो उसकी दुआएं मृत आत्मा को शांति और मुक्ति की राह पर आगे बढ़ाती हैं. दान करने की यह प्रक्रिया केवल एक धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक उपाय भी है. इससे परिवार के सदस्य धीरे-धीरे उस बड़े शोक और भावनात्मक बोझ से बाहर निकल पाते हैं. कपड़ों की ही तरह मृतक के अंतिम दिनों में इस्तेमाल किए गए बिस्तर, तकिए या चटाई को भी दान कर देना चाहिए या उनका शुद्धिकरण करना चाहिए.
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