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धर्म-अध्यात्म
Ganesh Ashtakam पाठ से मिलती है विशेष कृपा, जानें सटीक तरीका और लाभ
Tara Tandi
4 Jun 2025 3:24 PM IST

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Ganesh Ashtakam ज्योतिष न्यूज़: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और शुभारंभ के देवता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले सबसे पहले श्री गणेश का नाम लिया जाता है, ताकि कार्य बिना किसी विघ्न के सफलतापूर्वक पूर्ण हो सके। इन्हें प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्र, चालीसा, कवच और स्तोत्रों का पाठ किया जाता है। इन्हीं में से एक अत्यंत प्रभावशाली और सिद्ध स्तोत्र है — “श्री गणेश अष्टकम स्तोत्र”। माना जाता है कि इस स्तोत्र का नियमित पाठ विशेषकर हर बुधवार को करने से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और गणेशजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
श्री गणेश अष्टकम स्तोत्र का परिचय
‘अष्टक’ का अर्थ होता है — आठ श्लोक। इस स्तोत्र में भगवान गणेश के आठ दिव्य स्वरूपों का वर्णन किया गया है, जिनमें उनकी महिमा, शक्ति, बुद्धि और भक्तों पर कृपा की भावना समाहित होती है। इस स्तोत्र का उल्लेख कई पुरातन ग्रंथों में भी मिलता है, और यह योग, ध्यान व पूजा की दृष्टि से विशेष रूप से उपयोगी माना गया है।
बुधवार को क्यों करें श्री गणेश अष्टकम का पाठ?
हिंदू पंचांग के अनुसार बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने, श्रीगणेश को दूर्वा अर्पित करने और अष्टकम स्तोत्र का पाठ करने से विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है। बुध ग्रह का संबंध भी बुद्धि और संवाद से है, और श्री गणेश को 'बुद्धि का अधिपति' माना गया है। इसलिए इस दिन उनका स्मरण और स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायक होता है।
श्री गणेश अष्टकम स्तोत्र के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
श्री गणेश अष्टकम स्तोत्र का नियमित पाठ करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
जीवन की बाधाएं दूर होती हैं – कार्यों में आने वाली अड़चनें स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
बुद्धि और विवेक की प्राप्ति – विद्यार्थी, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले या व्यापारियों के लिए यह स्तोत्र अत्यंत लाभकारी है।
घर-परिवार में शांति बनी रहती है – यह स्तोत्र नकारात्मक ऊर्जा को हटाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति – भगवान गणेश की कृपा से दरिद्रता का नाश होता है और लक्ष्मी का वास होता है
राहु-केतु और बुध ग्रह के दोषों से मुक्ति – जिनकी कुंडली में बुध या राहु-केतु से संबंधित दोष हों, उन्हें इस स्तोत्र से शांति मिलती है।
पाठ की विधि
बुधवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान पर श्रीगणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
उन्हें दूर्वा, लाल फूल, मोदक और सिंदूर अर्पित करें।
दीपक और धूप जलाकर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का 11 बार जप करें।
अब श्री गणेश अष्टकम स्तोत्र का पाठ श्रद्धा और ध्यानपूर्वक करें।
यदि संभव हो तो पाठ के अंत में श्री गणेश को 21 दूर्वा अर्पण करें और प्रार्थना करें कि वे आपके जीवन से सभी विघ्नों को दूर करें।
समाज में बढ़ती लोकप्रियता
आजकल तनाव और असफलताओं से जूझते लोगों के बीच श्री गणेश अष्टकम स्तोत्र की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। युवाओं में भी यह आस्था का केंद्र बनता जा रहा है। कुछ आध्यात्मिक संस्थाएं हर बुधवार को ऑनलाइन पाठ और ध्यान सत्र आयोजित करती हैं, जहाँ लोग एक साथ मिलकर इस स्तोत्र का पाठ करते हैं।
श्री गणेश अष्टकम स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि यह एक आध्यात्मिक साधना है जो न केवल हमारे मन को शांत करती है बल्कि हमारे जीवन में स्थिरता, सफलता और संतुलन भी लाती है। यदि आप नियमित रूप से, विशेषकर बुधवार को इस स्तोत्र का पाठ करते हैं तो निश्चित रूप से भगवान गणेश की कृपा आप पर बनी रहेगी और जीवन के हर मोड़ पर उनका मार्गदर्शन मिलेगा।
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