धर्म-अध्यात्म

Nirjala Ekadashi से लेकर गंगा दशहरा तक, ये हैं इस महीने के शुभ दिन

Tara Tandi
14 May 2025 4:31 PM IST
Nirjala Ekadashi से लेकर गंगा दशहरा तक, ये हैं इस महीने के शुभ दिन
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Nirjala Ekadashi ज्योतिष न्यूज़: ज्येष्ठ माह 13 मई से शुरू होगा। यह हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना है। गंगा दशहरा, वट सावित्री व्रत के साथ-साथ इस माह में कई महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार आते हैं। यह महीना सूर्य देव की उपासना के लिए भी विशेष माना जाता है। साथ ही, यदि आप इस भीषण गर्मी वाले महीने में जल का दान करते हैं तो उससे भी आपको शुभ फल की प्राप्ति होगी। इस माह में आने वाले व्रत और त्योहारों के दौरान आप जल दान कर सकते हैं। अब आइए जानें ज्येष्ठ माह में कौन-कौन से व्रत और त्योहार आएंगे।
नारद जयंती: 13 मई 2025 (नारद जयंती पर, भगवान नारद को देवताओं और मनुष्यों के बीच संचार के सेतु के रूप में पूजा जाता है।
वृषभ संक्रांति: 15 मई 2025 (जब सूर्य राशि परिवर्तन करता है, उस दिन को संक्रांति कहते हैं। 15 तारीख को सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेगा, इसलिए इस दिन को वृषभ संक्रांति कहा जाएगा।
संकष्टी चतुर्थी: 16 मई 2025 (इस दिन विघ्न-बाधाओं को दूर करने वाले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।)
अपरा एकादशी: 23 मई 2025 (एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।)
शनि त्रयोदशी और प्रदोष व्रत: 24 मई 2025 (शनि त्रयोदशी और प्रदोष व्रत 24 तारीख को है, यह दिन शनिदेव और भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
वट सावित्री व्रत: 26 मई 2025 (वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं।)
ज्येष्ठ अमावस्या और शनि जयंती: 27 मई 2025 (हिंदू धर्म में ज्येष्ठ अमावस्या को विशेष माना जाता है, यह दिन शनिदेव की पूजा के साथ उनकी पूजा के लिए भी बहुत शुभ होता है। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था)
निर्जला एकादशी: 6 जून 2025 (निर्जला एकादशी व्रत सभी एकादशियों में सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि इस दिन जल ग्रहण किए बिना व्रत रखा जाता है।)
गंगा दशहरा: 5 जून 2025 (गंगा दशहरा का त्यौहार हर साल माँ गंगा के अवतरण के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।)
वट पूर्णिमा व्रत: 10 जून 2025 (वट पूर्णिमा व्रत जून में है, इस दिन विवाहित महिलाएं सौभाग्य के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं।)
ज्येष्ठ पूर्णिमा: 11 जून 2025 (ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ज्येष्ठ माह का समापन होगा। मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति स्नान, ध्यान, जप और दान करता है, उसे शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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