धर्म-अध्यात्म

हरतालिका तीज को क्यों कहते हैं हरतालिका जानें पौराणिक कथा

nidhi
14 Sept 2026 10:21 AM IST
हरतालिका तीज को क्यों कहते हैं हरतालिका जानें पौराणिक कथा
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हरतालिका तीज
हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण से जुड़ा माना जाता है। इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस व्रत का नाम 'हरतालिका' आखिर कैसे पड़ा? इसके पीछे माता पार्वती और उनकी सखियों से जुड़ी एक प्रचलित पौराणिक कथा है।
कैसे बना 'हरतालिका' नाम?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 'हरतालिका' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है—'हरत' और 'आलिका'। यहां 'हरत' का अर्थ हरण करना और 'आलिका' का अर्थ सखी या सहेली बताया जाता है। कथा के अनुसार माता पार्वती की सखी उन्हें उनके पिता के घर से वन में ले गई थीं। इसी प्रसंग के कारण इस व्रत को हरतालिका तीज कहा जाने लगा।
भगवान शिव को पति बनाना चाहती थीं पार्वती
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। दूसरी ओर उनके पिता हिमवान माता पार्वती के विवाह को लेकर चिंतित थे। कथा में वर्णन मिलता है कि माता पार्वती के विवाह का प्रस्ताव भगवान विष्णु के साथ तय करने की बात हुई। जब माता पार्वती को इसकी जानकारी मिली तो वह दुखी हो गईं क्योंकि उन्होंने मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान लिया था।
सखी पार्वती को ले गईं वन
माता पार्वती ने अपनी मन की बात एक सखी को बताई। इसके बाद उनकी सखी उन्हें एक घने वन में ले गई ताकि उनकी इच्छा के विरुद्ध विवाह न हो सके। वहां माता पार्वती ने भगवान शिव की आराधना जारी रखी। मान्यता है कि भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन माता पार्वती ने रेत से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा की। उनकी कठोर तपस्या और समर्पण से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।
शिव-पार्वती के मिलन से जुड़ा व्रत
इसके बाद माता पार्वती के पिता को उनकी इच्छा का पता चला और अंततः भगवान शिव के साथ उनके विवाह को स्वीकार किया गया। आगे चलकर शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। इसी कथा को हरतालिका तीज व्रत की धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि इस दिन सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। अविवाहित युवतियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज का नाम केवल एक पर्व की पहचान नहीं बल्कि माता पार्वती की दृढ़ इच्छा, उनकी सखी के सहयोग और भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति से जुड़ी कथा को भी अपने भीतर समेटे हुए है।
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