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धर्म-अध्यात्म
कान्हा की पूजा में देरी हो जाए तो पंडित जी से जानें उपाय
Ratna Netam
4 Sept 2026 2:25 PM IST

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धर्म : जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का सबसे पावन पर्व माना जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी की रात 12 बजे कान्हा के जन्म का उत्सव मनाने और पूजा करने की विशेष परंपरा है। भक्त इस समय भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं, उन्हें पंचामृत से स्नान कराते हैं, नए वस्त्र पहनाते हैं और माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं।
हालांकि कई बार स्वास्थ्य, पारिवारिक जिम्मेदारियों, नौकरी या किसी अन्य कारण से लोगों के लिए मध्यरात्रि में पूजा करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में कई भक्तों के मन में सवाल रहता है कि क्या बिना रात 12 बजे पूजा किए जन्माष्टमी का व्रत और पूजन पूरा माना जाएगा? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण भाव के भूखे हैं और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा का विशेष महत्व होता है।
मध्यरात्रि पूजा क्यों मानी जाती है खास?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी पर निशीथ काल यानी मध्यरात्रि का समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस समय भगवान कृष्ण के जन्म का स्मरण करते हुए पूजा, आरती और भजन किए जाते हैं।
मान्यता है कि इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा होती है और भक्त भगवान के जन्म उत्सव में शामिल होकर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं। इसी कारण मंदिरों में भी रात 12 बजे विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है।
अगर रात 12 बजे पूजा न कर पाएं तो क्या करें?
पंडितों के अनुसार, अगर किसी कारणवश मध्यरात्रि में पूजा करना संभव नहीं है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार सुबह या दिन में भी भगवान श्रीकृष्ण की पूजा कर सकते हैं।
भगवान कृष्ण के लिए सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति मानी जाती है। यदि कोई व्यक्ति पूरे नियमों का पालन करते हुए मन से भगवान की पूजा करता है तो उसे भी पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।
सुबह पूजा करने की विधि
अगर रात में पूजा नहीं कर पाएं तो सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
इसके बाद भगवान को जल, पंचामृत, फूल, तुलसी दल, माखन-मिश्री और फल अर्पित करें। दीपक जलाकर भगवान कृष्ण की आरती करें और उनके मंत्रों का जाप करें।
आप भगवान से अपनी श्रद्धा और भाव के साथ प्रार्थना करें। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती।
घर पर छोटे रूप में कर सकते हैं पूजा
कई लोग नौकरी या अन्य कारणों से रात में लंबे समय तक पूजा नहीं कर पाते। ऐसे में घर पर छोटे रूप में भी जन्माष्टमी पूजन किया जा सकता है।
भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप को सजाएं, उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और अपनी क्षमता के अनुसार भोग लगाएं। पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए भगवान को तुलसी दल जरूर अर्पित करें।
व्रत रखने वालों के लिए जरूरी बातें
जो लोग जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं, उनके लिए भी समय और नियमों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ लोग रात 12 बजे पूजा के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग अगले दिन पारण करते हैं।
अगर किसी कारण मध्यरात्रि में पूजा नहीं हो पाती तो परिवार की परंपरा और अपनी सुविधा के अनुसार व्रत पूरा किया जा सकता है। किसी भी धार्मिक कार्य में भावना और श्रद्धा को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।
क्या भगवान कृष्ण नाराज होंगे?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों की भावना को देखते हैं। केवल समय का पालन ही नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और भक्ति भी महत्वपूर्ण होती है।
यदि कोई भक्त मजबूरी के कारण रात 12 बजे पूजा नहीं कर पाता, लेकिन पूरे विश्वास और प्रेम से भगवान का स्मरण करता है, तो इसे भी भक्ति का ही रूप माना जाता है।
पंडित जी की सलाह
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, जन्माष्टमी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का महत्व जरूर है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार पूजा करने में कोई दोष नहीं माना जाता। भक्त को अपनी श्रद्धा बनाए रखनी चाहिए और भगवान कृष्ण का नाम स्मरण करना चाहिए।
यदि संभव हो तो निशीथ काल में भगवान का ध्यान करें। अगर यह संभव नहीं है तो सुबह पूजा करके भगवान को भोग अर्पित करें और परिवार के साथ जन्माष्टमी का उत्सव मनाएं।
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