धर्म-अध्यात्म

श्रीकृष्ण ने किनका वध करने के लिए उठाया सुदर्शन चक्र जानें पूरी कथा

nidhi
2 Sept 2026 1:40 PM IST
श्रीकृष्ण ने किनका वध करने के लिए उठाया सुदर्शन चक्र जानें पूरी कथा
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श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र
धर्म : भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख अस्त्रों में सुदर्शन चक्र का विशेष स्थान है। हिंदू धर्मग्रंथों में सुदर्शन चक्र मूलतः भगवान विष्णु का दिव्य आयुध माना गया है और श्रीकृष्ण विष्णु के अवतार हैं। श्रीकृष्ण से जुड़ी कई कथाओं में सुदर्शन चक्र के प्रयोग या उसे उठाने का उल्लेख मिलता है। हालांकि अलग-अलग पुराणों और महाभारत की परंपराओं में इन प्रसंगों का विवरण अलग हो सकता है।
शिशुपाल वध में चला सुदर्शन चक्र
सुदर्शन चक्र से जुड़ा श्रीकृष्ण का सबसे प्रसिद्ध प्रसंग शिशुपाल वध है। महाभारत के सभा पर्व के अनुसार युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में श्रीकृष्ण को अग्रपूजा दिए जाने पर शिशुपाल ने उनका अपमान किया। श्रीकृष्ण ने उसकी अनेक गलतियों को क्षमा किया, लेकिन सीमा पार होने के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध कर दिया।
शाल्व के वध में भी किया प्रयोग
श्रीमद्भागवत पुराण में शाल्व और श्रीकृष्ण के युद्ध का वर्णन मिलता है। शाल्व के पास सौभ नाम का मायावी विमान था और उसने द्वारका पर आक्रमण किया था। भीषण युद्ध के बाद श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया। वर्णन के अनुसार चक्र ने शाल्व का सिर धड़ से अलग कर दिया और उसका अंत हुआ।
पौंड्रक और काशी नरेश का अंत
पौराणिक कथा में पौंड्रक नामक राजा ने स्वयं को असली वासुदेव बताना शुरू कर दिया था। उसने श्रीकृष्ण को अपने दिव्य चिह्न त्यागने का संदेश तक भेज दिया। युद्ध होने पर श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से पौंड्रक का सिर काट दिया। इसी युद्ध में काशी के राजा का भी अंत हुआ। बाद की कथा में काशी से उत्पन्न कृत्या को नष्ट करने और काशी को दंडित करने के लिए भी सुदर्शन चक्र के प्रयोग का वर्णन मिलता है।
बाणासुर के युद्ध में चला चक्र
श्रीमद्भागवत में बाणासुर और श्रीकृष्ण के युद्ध का भी उल्लेख है। बाणासुर की हजार भुजाएं बताई गई हैं। युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने अपने चक्र से उसकी अनेक भुजाएं काट दीं। भगवान शिव के हस्तक्षेप के बाद श्रीकृष्ण ने बाणासुर का जीवन छोड़ दिया।
भीष्म के सामने उठाया था चक्र
महाभारत युद्ध का प्रसंग भी बेहद प्रसिद्ध है। श्रीकृष्ण ने युद्ध में हथियार न उठाने का संकल्प लिया था। लेकिन जब भीष्म पितामह पांडव सेना पर प्रचंड प्रहार कर रहे थे और अर्जुन अपेक्षित आक्रामकता नहीं दिखा रहे थे, तब श्रीकृष्ण क्रोधित होकर रथ से उतर पड़े और भीष्म की ओर बढ़े। महाभारत के इस प्रसंग में उन्हें रथ का पहिया उठाकर भीष्म की ओर दौड़ते बताया गया है; लोकप्रिय परंपरा में इसे अक्सर सुदर्शन चक्र से जोड़कर सुनाया जाता है। इसलिए शास्त्रीय वर्णन और लोकप्रचलित कथा के इस अंतर को ध्यान में रखना चाहिए।
इस प्रकार शिशुपाल, शाल्व, पौंड्रक और बाणासुर जैसे प्रसंगों में श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र की महत्वपूर्ण भूमिका मिलती है। यह दिव्य अस्त्र धार्मिक परंपरा में धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश का प्रतीक माना जाता है।
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