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धर्म-अध्यात्म
घर में ऊर्जा का संतुलन जरूरी, वास्तु के अनुसार इस स्थान पर ज्यादा देर रहना माना जाता है अशुभ
nidhi
22 July 2026 9:50 AM IST

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वास्तु शास्त्र: घर के इस कोने में ज्यादा समय बिताने से बचें, बुद्धि और सोच पर पड़ता है असर
धर्म : वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और कोनों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में मौजूद हर दिशा और स्थान का व्यक्ति के जीवन, विचारों और व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है। वास्तु के अनुसार, घर के कुछ स्थानों पर लंबे समय तक रहने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और इसका असर मानसिक शांति, निर्णय क्षमता और कार्यक्षमता पर पड़ सकता है।
हालांकि, वास्तु शास्त्र धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है, इसके दावों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम नहीं माना जाता। फिर भी कई लोग अपने घर की व्यवस्था और वातावरण को बेहतर बनाने के लिए इन मान्यताओं का पालन करते हैं।
दक्षिण-पश्चिम कोने को लेकर क्या कहती है मान्यता?
वास्तु शास्त्र में दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) को स्थिरता और नियंत्रण से जुड़ा माना जाता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इस दिशा में गलत व्यवस्था होने पर घर में तनाव, भ्रम या नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं।
कहा जाता है कि इस स्थान पर बहुत अधिक समय बैठकर ऐसे काम नहीं करने चाहिए जिनमें लगातार मानसिक एकाग्रता की जरूरत हो, खासकर यदि वहां भारी अव्यवस्था, अंधेरा या गंदगी हो। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर के इस हिस्से को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है।
उत्तर-पूर्व दिशा को माना जाता है विशेष
वास्तु में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिकता से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि घर का यह हिस्सा खुला, साफ और रोशनी वाला होना चाहिए। कई लोग यहां पूजा स्थल या ध्यान करने का स्थान बनाना पसंद करते हैं।
घर में सकारात्मक माहौल के लिए वास्तु के अनुसार उपाय
घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी आने दें।
बेकार सामान और टूटी वस्तुओं को जमा न करें।
पूजा या ध्यान के स्थान को साफ रखें।
घर में हवा का उचित आवागमन बनाए रखें।
कमरों और कोनों में अनावश्यक अव्यवस्था से बचें।
क्या सच में किसी कोने में बैठने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है?
वास्तु मान्यताओं में ऐसी बातें कही जाती हैं कि कुछ स्थानों की गलत ऊर्जा व्यक्ति के विचारों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। व्यक्ति की सोच, व्यवहार और निर्णय क्षमता पर शिक्षा, परिस्थितियां, मानसिक स्थिति और जीवनशैली जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ता है।
इसलिए वास्तु को एक सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जा सकता है। घर को साफ, व्यवस्थित और आरामदायक रखना किसी भी स्थिति में मानसिक शांति और बेहतर वातावरण बनाने में मदद कर सकता है।
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