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अधिकमास की एकादशी: जून में करें पुरुषोत्तम भगवान की आराधना

New Delhi नई दिल्ली : हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिकमास की दूसरी एकादशी इस महीने शुक्ल पक्ष में मनाई जाएगी। इस महीने की प्रमुख एकादशी में निर्जला एकादशी भी शामिल है। एकादशी के दिन व्रत रखने और पूजा करने से विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अर्जुन को परमा एकादशी के महत्व के बारे में बताया था। इस एकादशी पर पुरुषोत्तम भगवान की विशेष पूजा का विधान है। इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिकमास में दो एकादशी होती हैं। पहली एकादशी पद्मिनी एकादशी और दूसरी पद्मा एकादशी है। इन दोनों एकादशी पर व्रत और पूजा करने से मन, शरीर और आत्मा को लाभ मिलता है। साथ ही, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
एकादशी के दिन उपवास रखना, भगवान का ध्यान करना और धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान के प्रति भक्ति और श्रद्धा रखने वाले व्रती अपने पापों से मुक्ति पाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
धार्मिक आयोजनों और मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजा और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भक्तजन इस दिन भजन, कीर्तन और पाठ में भाग लेकर अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं। अधिकमास की एकादशी पर पुरुषोत्तम भगवान की पूजा करने से घर और परिवार में सुख-शांति बढ़ती है।
कुल मिलाकर, जून में आने वाली अधिकमास की एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आध्यात्मिक लाभ और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी है। इस दिन व्रत रखने, पूजा और ध्यान करने से मन, शरीर और आत्मा को शांति मिलती है।





