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Religion Spirituality ,धर्म अध्यात्म: सर्दियों का मौसम आते ही घरों में लगे तुलसी के पौधे पर ठंड का असर साफ दिखने लगता है। पत्तियां मुरझाने लगती हैं, रंग फीका पड़ जाता है और कई बार पूरा पौधा सूखने की कगार पर पहुंच जाता है। जबकि तुलसी को भारतीय घरों में न सिर्फ धार्मिक बल्कि आयुर्वेदिक महत्व भी प्राप्त है। ऐसे में सर्दियों में इसकी सही देखभाल जरूरी हो जाती है। थोड़ी सी सावधानी और कुछ आसान उपाय अपनाकर ठंड के मौसम में भी तुलसी को हरा-भरा रखा जा सकता है।
सर्दियों में तुलसी के सूखने का सबसे बड़ा कारण कम तापमान और ठंडी हवा होती है। ठंड के कारण पौधे की जड़ों में नमी जम जाती है, जिससे पोषक तत्वों का प्रवाह धीमा पड़ता है। इसके अलावा धूप की कमी और जरूरत से ज्यादा पानी भी तुलसी को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए सबसे पहले पौधे को सही जगह पर रखना जरूरी है। तुलसी के गमले को ऐसी जगह रखें जहां सुबह की हल्की धूप मिल सके। दिन में कम से कम 3 से 4 घंटे की धूप तुलसी के लिए फायदेमंद मानी जाती है।
पानी देने में संतुलन बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। सर्दियों में तुलसी को रोज पानी देने की जरूरत नहीं होती। मिट्टी को छूकर देखें, अगर ऊपरी सतह सूखी लगे तभी पानी दें। बहुत ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं, जिससे पौधा जल्दी खराब हो जाता है। बेहतर होगा कि हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल किया जाए, ताकि ठंड का असर जड़ों पर कम पड़े।
ठंडी हवा से बचाव भी तुलसी को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर तुलसी खुली छत या बालकनी में रखी है तो रात के समय उसे किसी कपड़े, जूट की बोरी या पतले प्लास्टिक से ढक दें। इससे ठंडी हवा और पाले से पौधा सुरक्षित रहेगा। ध्यान रखें कि दिन में ढकाव हटा दें ताकि पौधे को हवा और धूप मिल सके।
मिट्टी की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। सर्दियों से पहले गमले की मिट्टी में थोड़ी सी जैविक खाद, जैसे गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिला दें। इससे मिट्टी में गर्माहट बनी रहती है और पौधे को जरूरी पोषण मिलता रहता है। महीने में एक बार खाद देना पर्याप्त होता है। ज्यादा खाद डालना नुकसानदायक भी हो सकता है।
एक और आसान उपाय है गमले की मिट्टी को सूखने से बचाना। इसके लिए मिट्टी की ऊपरी सतह पर सूखी पत्तियां या नारियल के छिलके की पतली परत बिछाई जा सकती है। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और ठंड का असर सीधे जड़ों तक नहीं पहुंचता। यह तरीका खासतौर पर ज्यादा ठंड वाले इलाकों में उपयोगी माना जाता है।
सर्दियों में तुलसी की कटाई-छंटाई से भी बचना चाहिए। इस मौसम में पत्तियां तोड़ने या शाखाएं काटने से पौधे पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कोशिश करें कि केवल सूखी या खराब पत्तियों को ही हटाएं। इससे पौधे की ऊर्जा सुरक्षित रहती है और वह ठंड के मौसम को बेहतर तरीके से झेल पाता है।
अगर बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है तो तुलसी के गमले को रात में घर के अंदर भी रखा जा सकता है। खिड़की के पास रखें, जहां रोशनी मिलती रहे। सुबह होते ही फिर से बाहर रख दें। इस तरह तापमान में संतुलन बना रहता है और पौधा सुरक्षित रहता है।
इन छोटे-छोटे लेकिन असरदार उपायों को अपनाकर सर्दियों में भी तुलसी को सूखने से बचाया जा सकता है। सही धूप, सीमित पानी, ठंडी हवा से बचाव और समय-समय पर हल्की खाद तुलसी को स्वस्थ रखने के लिए काफी है। थोड़ी सी देखभाल से आपका तुलसी का पौधा कड़ाके की ठंड में भी हरा-भरा और जीवंत बना रह सकता है।
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