धर्म-अध्यात्म

Ganpati पूजन में दूर्वा का है विशेष स्थान जानिए इसे अर्पण करने की सही विधि

Tara Tandi
29 May 2025 10:29 AM IST
Ganpati पूजन में दूर्वा का है विशेष स्थान जानिए इसे अर्पण करने की सही विधि
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Ganpati Puja ज्योतिष न्यूज़: बुधवार का दिन गौरी पुत्र गणेश को समर्पित है। आपने अक्सर भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का प्रयोग होते देखा होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार बप्पा को दूर्वा बहुत प्रिय है। दूर्वा चढ़ाने की पौराणिक कथा - पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक राक्षस था। जिसके कारण स्वर्ग और पृथ्वी के सभी लोग परेशान थे। वह राक्षस इतना खतरनाक था कि वह ऋषि-मुनियों सहित आम लोगों को भी जिंदा निगल जाता था. इससे परेशान होकर देवराज इंद्र के साथ सभी देवी-देवता और ऋषिगण महादेव से प्रार्थना करने गए। सभी ने भगवान शिव से इस राक्षस का वध करने की प्रार्थना की। शिवजी ने सभी देवी-देवताओं और ऋषियों की प्रार्थना सुनकर उनसे कहा कि अनलासुर का अंत केवल गणपति ही कर सकते हैं।
पेट की जलन दूर करने के लिए चढ़ाई दूर्वा - जब भगवान गणेश ने अनलासुर को निगल लिया तो उनके पेट में बहुत जलन होने लगी। इससे बचने के लिए कई उपाय किए गए, लेकिन भगवान गणेश के पेट का दर्द ठीक नहीं हो रहा था। तब कश्यप ऋषि ने एक उपाय सोचा. उन्होंने दूर्वा की 21 गांठें बनाईं और भगवान गणेश को खाने के लिए दीं। जब बप्पा ने दूर्वा खाई तो उनके पेट का दर्द ठीक हो गया। तभी से भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाई जाने लगी।
पूजा में दूर्वा का महत्व - दूर्वा को दूब, अमृता, अनंता, महाऔषधि जैसे कई नामों से भी जाना जाता है। सनातन धर्म में हल्दी और दूर्वा के बिना कोई भी शुभ कार्य पूरा नहीं माना जाता है।
दूर्वा चढ़ाने के नियम - भगवान गणेश को दूर्वा खास तरीके से चढ़ाई जाती है। सबसे पहले दूर्वा का जोड़ा बनाया जाता है। फिर इसे भगवान गणेश को चढ़ाया जाता है। 22 दूर्वा को एक साथ जोड़ने पर दूर्वा के 11 जोड़े तैयार हो जाते हैं। इन 11 जोड़ों को भगवान गणेश को चढ़ाना चाहिए।
दूर्वा कहां तोड़ें?
दूर्वा को किसी मंदिर के बगीचे से या फिर साफ जगह से ही लेना चाहिए। ऐसी जगह से दूर्वा न लें जहां गंदा पानी बहता हो। दूर्वा चढ़ाने से पहले उसे साफ पानी से धो लेना चाहिए।
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