धर्म-अध्यात्म

सावन में भक्तों को मिलेगा बाबा काशी विश्वनाथ के चार दुर्लभ स्वरूपों का दर्शन

Ratna Netam
29 July 2026 6:20 PM IST
सावन में भक्तों को मिलेगा बाबा काशी विश्वनाथ के चार दुर्लभ स्वरूपों का दर्शन
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धर्म : कल से सावन का पावन महीना शुरू होने जा रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस महीने में देशभर के शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम में भी सावन को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार सावन के चारों सोमवार पर बाबा काशी विश्वनाथ अलग-अलग दिव्य और भव्य स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन देंगे। हर सोमवार का श्रृंगार विशेष धार्मिक महत्व रखता है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार को बाबा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इन चारों स्वरूपों का दर्शन वर्ष में केवल एक बार ही होता है, इसलिए श्रद्धालुओं में इसे लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।

पहला सोमवार: शंकर स्वरूप का होगा दिव्य श्रृंगार

सावन के पहले सोमवार को बाबा काशी विश्वनाथ का शंकर स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इस अवसर पर गर्भगृह में भगवान शिव की अस्थायी प्रतिमा स्थापित की जाएगी और उसका भव्य फूलों से अलंकरण होगा। यह स्वरूप अत्यंत मनोहारी माना जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालु सप्तऋषि आरती के बाद इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। मान्यता है कि इस दिन बाबा के शंकर स्वरूप के दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

दूसरा सोमवार: गौरी-शंकर रूप में मिलेंगे दर्शन

सावन के दूसरे सोमवार, 10 अगस्त 2026 को बाबा काशी विश्वनाथ का गौरी-शंकर स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। इस विशेष श्रृंगार में भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप का दर्शन कराया जाएगा। यह रूप वैवाहिक जीवन, पारिवारिक सुख और दांपत्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु पूरे वर्ष इस दुर्लभ दर्शन की प्रतीक्षा करते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस दिन विशेष पूजा और आरती का आयोजन भी किया जाएगा।

तीसरा सोमवार: अर्धनारीश्वर स्वरूप की झलक

सावन के तीसरे सोमवार, 17 अगस्त 2026 को बाबा काशी विश्वनाथ अर्धनारीश्वर स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। यह स्वरूप भगवान शिव और शक्ति के अद्वैत स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अर्धनारीश्वर रूप सृष्टि में स्त्री और पुरुष के समान महत्व तथा संतुलन का संदेश देता है। इस विशेष श्रृंगार की तैयारियां पहले से ही शुरू कर दी गई हैं और मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाएगा।

चौथा सोमवार: रुद्राक्ष स्वरूप होगा आकर्षण का केंद्र

सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को बाबा काशी विश्वनाथ का रुद्राक्ष स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया जाएगा। इस दिन लगभग पांच लाख रुद्राक्ष के दानों से बाबा का अलौकिक श्रृंगार होगा। रुद्राक्ष भगवान शिव का अत्यंत प्रिय माना जाता है और इस स्वरूप के दर्शन को अत्यंत पुण्यदायी समझा जाता है। विशेष बात यह है कि बाबा पर अर्पित किए गए रुद्राक्ष बाद में श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किए जाएंगे। इस कारण अंतिम सोमवार को सबसे अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है।

सावन के दौरान काशी विश्वनाथ धाम में प्रतिदिन मंगला आरती, भोग आरती, संध्या आरती और सप्तऋषि आरती के साथ विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, बैरिकेडिंग, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, स्वच्छता और दर्शन व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस और प्रशासन की अतिरिक्त टीमें भी तैनात रहेंगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव की सच्चे मन से पूजा करने, जलाभिषेक करने और सोमवार का व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी पहुंचते हैं। इस बार चारों सोमवार पर होने वाले अलग-अलग दिव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव का विशेष अवसर बनेंगे। बाबा के इन दुर्लभ स्वरूपों के दर्शन को लेकर शिवभक्तों में अभी से उत्साह चरम पर है और काशी नगरी एक बार फिर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजने के लिए तैयार है।

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