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धर्म-अध्यात्म
Shani Jayanti पर ये गलती न करें, वरना नाराज़ हो सकते हैं शनि देव, 3 सरल उपाय से राहत
nidhi
16 May 2026 11:45 AM IST

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शनि जयंती पर सावधान!
Shani Jayanti 2026: शनि देव का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर, अनुशासन और कर्मों का हिसाब एक साथ सामने आ जाता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में शनि को केवल दंड देने वाला ग्रह नहीं माना गया, बल्कि उन्हें न्याय और संतुलन का देवता कहा गया है. यही वजह है कि शनि जयंती का दिन बेहद खास माना जाता है. इस दिन लोग अपनी परेशानियों, ग्रह दोष और जीवन की रुकावटों से राहत पाने के लिए विशेष पूजा करते हैं.
खास बात यह है कि शनि पूजा में सरसों का तेल, काले तिल और दीपक का उपयोग सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि गहरे ज्योतिषीय संकेतों से जुड़ा हुआ माना जाता है. मान्यता है कि इन चीजों के सही प्रयोग से शनि की अशुभ दृष्टि शांत होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं.
कब मनाई जाएगी शनि जयंती 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. साल 2026 में अमावस्या तिथि 16 मई सुबह 05 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 17 मई देर रात 01 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 16 मई 2026, शनिवार को मनाई जाएगी. ज्योतिष में यह संयोग बेहद प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि शनिवार खुद शनि देव का दिन होता है. कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस बार शनि जयंती पर की गई पूजा का असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं.
शनि देव और कर्म का गहरा संबंध
क्यों डरते हैं लोग शनि से?
अक्सर लोग शनि का नाम आते ही घबरा जाते हैं, लेकिन ज्योतिष कहता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों का फल देते हैं, अगर जीवन में लगातार मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही, नौकरी में दिक्कत आ रही हो या आर्थिक परेशानी बनी हुई हो, तो लोग शनि दोष की बात करने लगते हैं. हालांकि कई ज्योतिष विशेषज्ञ मानते हैं कि शनि इंसान को मजबूत बनाते हैं. वे जीवन में धैर्य, अनुशासन और संघर्ष की सीख देते हैं. यही कारण है कि शनि जयंती पर पूजा के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है.
सरसों तेल का ज्योतिषीय महत्व
क्यों चढ़ाया जाता है सरसों का तेल?
शनि पूजा में सरसों तेल का प्रयोग सबसे ज्यादा देखा जाता है. मान्यता है कि सरसों का तेल शनि ग्रह की उग्र ऊर्जा को शांत करता है. यही वजह है कि भक्त शनि मंदिर में तेल अर्पित करते हैं या पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाते हैं. गांवों और छोटे शहरों में आज भी लोग शनिवार के दिन लोहे के कटोरे में सरसों तेल देखकर उसमें अपना चेहरा देखते हैं और फिर उसका दान करते हैं. माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और बुरी नजर का असर भी घटता है.
काले तिल क्यों माने जाते हैं शुभ?
शनि दोष कम करने में मददगार
काले तिल को शनि देव से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण चीजों में माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक काले तिल व्यक्ति के पुराने कर्मों से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद करते हैं. इसी वजह से शनि जयंती पर लोग काले तिल का दान करते हैं, तिल मिले जल से स्नान करते हैं और पूजा में तिल अर्पित करते हैं. कई परिवारों में इस दिन तिल के लड्डू या तिल से बनी चीजें गरीबों को बांटने की परंपरा भी है. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि कमजोर हो या राहु-केतु का प्रभाव ज्यादा हो, तो काले तिल का दान लाभकारी माना जाता है.
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