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धर्म-अध्यात्म
इंटरव्यू के नाम से छूटते हैं पसीने? गीता का यह श्लोक देगा हिम्मत
nidhi
8 Oct 2026 9:12 AM IST

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गीता का यह मंत्र बढ़ाएगा आत्मविश्वास
नई दिल्ली: नौकरी के लिए इंटरव्यू देना कई युवाओं के लिए तनावपूर्ण अनुभव होता है। अच्छी तैयारी के बावजूद जैसे ही इंटरव्यू का समय नजदीक आता है, दिल की धड़कन तेज होने लगती है, हाथ-पैर कांपने लगते हैं और मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं। क्या इंटरव्यू अच्छा जाएगा? अगर सवालों के जवाब नहीं दे पाए तो क्या होगा? नौकरी नहीं मिली तो आगे क्या करेंगे? ऐसी चिंताएं व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण की एक महत्वपूर्ण सीख ऐसी परिस्थितियों में मन को स्थिर रखने की प्रेरणा देती है।
भगवद्गीता के दूसरे अध्याय के 47वें श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कर्म और फल के संबंध को समझाते हैं। यह श्लोक जीवन में प्रयास, कर्तव्य और परिणाम को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का संदेश देता है।
भगवद्गीता का श्लोक
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
श्लोक का अर्थ
इस श्लोक का अर्थ है कि मनुष्य का अधिकार कर्म करने में है, उसके फल पर नहीं। व्यक्ति को केवल परिणाम की इच्छा से कर्म नहीं करना चाहिए और न ही कर्म न करने में आसक्ति रखनी चाहिए।
नौकरी के इंटरव्यू की स्थिति में इस शिक्षा का व्यावहारिक महत्व समझा जा सकता है। जब उम्मीदवार बार-बार इस बात की चिंता करता है कि उसका चयन होगा या नहीं, तो उसका ध्यान तैयारी और प्रदर्शन से हट सकता है। इसके विपरीत यदि वह अपनी तैयारी, ज्ञान और जवाब देने की क्षमता पर ध्यान केंद्रित करे तो घबराहट को संभालना आसान हो सकता है।
इंटरव्यू में आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए उम्मीदवार इस श्लोक की सीख को अपनी सोच में शामिल कर सकते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि नौकरी मिलने की इच्छा छोड़ दी जाए, बल्कि यह है कि परिणाम की अत्यधिक चिंता किए बिना पूरी ईमानदारी से प्रयास किया जाए।
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इंटरव्यू से पहले अपनी योग्यता के अनुसार तैयारी करना, संभावित सवालों का अभ्यास करना और कंपनी से जुड़ी जानकारी जुटाना जरूरी है। इसके अलावा धीमी और सामान्य गति से सांस लेना, पर्याप्त नींद लेना तथा समय से इंटरव्यू स्थल पर पहुंचना भी घबराहट कम करने में मदद कर सकता है।
भगवद्गीता की यह शिक्षा केवल नौकरी के इंटरव्यू तक सीमित नहीं है। परीक्षा, प्रतियोगिता और जीवन की दूसरी चुनौतियों में भी इसका संदेश उपयोगी हो सकता है। व्यक्ति अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करके असफलता के डर को बेहतर ढंग से संभाल सकता है।
इस प्रकार श्रीकृष्ण का संदेश याद दिलाता है कि सफलता के लिए परिश्रम जरूरी है, लेकिन परिणाम हमेशा व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं होता। इसलिए इंटरव्यू में जाने से पहले अपनी तैयारी पर भरोसा रखें और बिना अनावश्यक दबाव के सवालों का जवाब दें।
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