धर्म-अध्यात्म

संतान प्राप्ति के लिया नवरात्रि के पांचवें दिन करें मां स्कंदमाता की विशेष पूजा अर्चना...आपकी मनोकामना होगी पूरी

Subhi
17 April 2021 1:15 AM GMT
संतान प्राप्ति के लिया नवरात्रि के पांचवें दिन करें मां स्कंदमाता की विशेष पूजा अर्चना...आपकी मनोकामना होगी पूरी
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शक्ति की देवी मां दुर्गा की उपासना का पर्व है चैत्र नवरात्रि इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की हर दिन पूजा की जाती है.

शक्ति की देवी मां दुर्गा की उपासना का पर्व है चैत्र नवरात्रि इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की हर दिन पूजा की जाती है. आज 17 अप्रैल शनिवार को चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है और आज देवी के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जा रही है. शिव जी और मां पार्वती के पहले और षडानन यानी छह मुख वाले पुत्र कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है, इसलिए मां के इस रूप को स्कंदमाता कहा जाता है. संतान प्राप्ति के लिए मां स्कंदमाता की पूजा अर्चना को लाभकारी माना जाता है.

कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप?
मां स्कंदमाता के इस रूप की चार भुजाएं हैं और इनकी गोद में भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय बालरूप में विराजमान हैं. एक हाथ में कमल का फूल है, बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा वरदमुद्रा है और नीचे दूसरा श्वेत कमल का फूल है. सिंह इनका वाहन है. हमेशा कमल के आसन पर स्थित रहने के कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है. स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान में भी वृद्धि होती है इसलिए इन्हें विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है.
मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व
ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं. साथ ही माता रानी अगर प्रसन्न हो जाएं तो स्वास्थ्य संबंधी सभी दिक्कतें दूर हो जाती हैं (Health problems) खासकर त्वचा संबंधी कोई रोग हो तो उसे दूर करने के लिए आज मां स्कंदमाता की पूरे विधि विधान से पूजा करें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता की पूजा करने से ज्ञान और आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
ऐसे करें मां स्कंदमाता की पूजा
चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि को स्नान आदि के बाद माता की पूजा शुरू करें. मां की प्रतिमा या चित्र को गंगा जल से शुद्ध करें. इसके बाद कुमकुम, अक्षत, फूल, फल आदि अर्पित करें. मिष्ठान का भोग लगाएं. माता के सामने घी का दीपक जलाएं. पूरे विधि विधान और सच्चे मन से मां की पूजा करें. मां की आरती उतारें, कथा पढ़ें और अंत में मां स्कंदमाता के इस मंत्र का जाप करें-
स्कंदमाता का मंत्र-
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


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