धर्म-अध्यात्म

दिवाली पूजा में जरूर करें इस कथा का पाठ, विशेष महत्व

Rajeshwari Nishad
8 Nov 2026 6:44 PM IST
दिवाली पूजा में जरूर करें इस कथा का पाठ, विशेष महत्व
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धर्म। दीपावली हिंदू धर्म के सबसे बड़े और पवित्र त्योहारों में से एक है। इस दिन धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी तथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की पूजा के दौरान मां लक्ष्मी की आरती करने के साथ उनकी कथा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कथा सुनने और पढ़ने से पूजा का धार्मिक महत्व बढ़ता है और भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दीपावली पर लोग अपने घरों को दीपों, रंगोली और फूलों से सजाते हैं। शाम को शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर पूजा-अर्चना करते हैं। आइए जानते हैं मां लक्ष्मी से जुड़ी प्रचलित दिवाली कथा और पूजा में इसके महत्व के बारे में।
दिवाली पर क्यों किया जाता है मां लक्ष्मी का पूजन?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां लक्ष्मी धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की देवी हैं। दीपावली की अमावस्या की रात उनकी विशेष पूजा की जाती है।मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी अपने भक्तों के घरों में आती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी कारण दीपावली से पहले घरों की सफाई की जाती है और पूजा स्थल को विशेष रूप से सजाया जाता है।मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि और शुभ शुरुआत का देवता माना जाता है। इसलिए दोनों की एक साथ पूजा करने की परंपरा है।
मां लक्ष्मी की प्रचलित दिवाली कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के बीच बातचीत हो रही थी। माता लक्ष्मी को अपने सौभाग्य और वैभव पर गर्व हो गया था। तब भगवान विष्णु ने उन्हें बताया कि संसार में केवल धन और ऐश्वर्य ही सबसे महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि सदाचार, सेवा और अच्छे कर्म भी उतने ही जरूरी हैं।एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, एक साहूकार की बेटी नियमित रूप से पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने जाती थी। उस पेड़ पर मां लक्ष्मी का वास माना जाता था। उसकी श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर माता लक्ष्मी ने उसे दर्शन दिए और अपनी सखी बनने का प्रस्ताव रखा।साहूकार की बेटी ने माता लक्ष्मी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले अपने पिता से अनुमति लेने की बात कही। पिता ने बेटी की बात सुनकर उसे माता लक्ष्मी की सखी बनने की अनुमति दे दी।इसके बाद माता लक्ष्मी ने साहूकार के घर आने का वचन दिया। कुछ समय बाद उन्होंने साहूकार के घर पधारकर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। साहूकार और उसके परिवार ने माता का आदर-सत्कार किया और श्रद्धापूर्वक पूजा की।यह कथा श्रद्धा, अतिथि सत्कार और मां लक्ष्मी के प्रति समर्पण का महत्व बताती है।
भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने से जुड़ी दीपावली कथा
दीपावली से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की कथा भी शामिल है।मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद रावण का वध किया और माता सीता तथा लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे।उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। घरों और रास्तों पर दीप जलाकर भगवान श्रीराम का स्वागत किया गया था।इसी परंपरा को दीपावली के त्योहार से जोड़ा जाता है। आज भी लोग दीप जलाकर घरों को रोशन करते हैं और खुशियां मनाते हैं।हालांकि, यह कथा मुख्य रूप से दीपावली के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व से जुड़ी है, जबकि लक्ष्मी पूजन की अपनी अलग पूजा परंपराएं हैं।
मां लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान गणेश का महत्व
दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा करना विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश की आराधना से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। इसके बाद माता लक्ष्मी को फूल, अक्षत, रोली, धूप, दीप और मिठाई अर्पित की जाती है।कुछ परिवारों में भगवान कुबेर की पूजा भी की जाती है। भगवान कुबेर को धन का देवता माना जाता है। भक्त उनसे धन की रक्षा और आर्थिक उन्नति की कामना करते हैं।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजन की सरल विधि
सबसे पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।पूजा की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।दीपक जलाकर भगवान गणेश का स्मरण करें।माता लक्ष्मी को फूल, अक्षत, रोली, फल और मिठाई अर्पित करें।मां लक्ष्मी की आरती करें और परिवार के साथ कथा का पाठ करें।
अंत में सभी को प्रसाद वितरित करें।
दिवाली कथा का पाठ करते समय रखें इन बातों का ध्यानधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कथा का पाठ श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करना चाहिए। पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर आरती और कथा में शामिल हो सकते हैं।कथा पढ़ने के लिए किसी विशेष कठिन नियम की आवश्यकता नहीं है। अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा पद्धति के अनुसार इसका पाठ किया जा सकता है।दिवाली का वास्तविक संदेश केवल धन प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह त्योहार घर में प्रेम, सद्भाव, सदाचार और खुशियां बनाए रखने की प्रेरणा भी देता है।
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