धर्म-अध्यात्म

शिवलिंग पर पारिजात चढ़ाते समय न करें ये भूल

nidhi
22 Sept 2026 12:44 PM IST
शिवलिंग पर पारिजात चढ़ाते समय न करें ये भूल
x
शिवलिंग पर पारिजात चढ़ाने
हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा में फूलों का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं फूलों में पारिजात यानी हरसिंगार को बेहद पवित्र माना जाता है। सफेद पंखुड़ियों और नारंगी डंठल वाला यह सुगंधित फूल धार्मिक पूजा-पाठ में इस्तेमाल किया जाता है। कई धार्मिक मान्यताओं में पारिजात को देवताओं से जुड़ा दिव्य फूल बताया गया है। भगवान शिव को पारिजात अर्पित करते समय कुछ परंपरागत नियमों का पालन किया जाता है।
जमीन पर गिरा पारिजात भी माना जाता है पवित्र
आमतौर पर पूजा में जमीन पर गिरे हुए फूल चढ़ाने से बचने की परंपरा है, लेकिन पारिजात को इसका अपवाद माना जाता है। पारिजात का फूल रात में खिलता है और सुबह स्वयं पेड़ से नीचे गिर जाता है। धार्मिक परंपरा में पेड़ से प्राकृतिक रूप से गिरे साफ पारिजात के फूलों को उठाकर भगवान को अर्पित किया जाता है।
मान्यता के अनुसार पारिजात के फूल को पेड़ से तोड़ने के बजाय नीचे गिरे फूलों को चुनना उचित माना जाता है। इन्हें सम्मान के साथ इकट्ठा करके पूजा में इस्तेमाल किया जाता है।
पारिजात को धोने से क्यों बचते हैं?
पूजा परंपराओं में पारिजात के फूल को पानी से धोने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे एक व्यावहारिक कारण भी है। पारिजात बेहद नाजुक फूल होता है। पानी में धोने से इसकी पंखुड़ियां जल्दी टूट सकती हैं और फूल की प्राकृतिक सुगंध व स्वरूप प्रभावित हो सकता है।
धार्मिक मान्यता में प्राकृतिक रूप से गिरे स्वच्छ पारिजात को उसी अवस्था में भगवान को अर्पित करना शुभ माना जाता है। हालांकि यदि फूल मिट्टी, गंदगी या किसी दूषित स्थान पर गिरा हो तो उसे पूजा में इस्तेमाल न करना बेहतर माना जाता है।
शिवलिंग पर ऐसे चढ़ाएं पारिजात
सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल को साफ करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करने के बाद साफ स्थान से एकत्र किए गए पारिजात के फूल श्रद्धापूर्वक चढ़ाए जा सकते हैं। फूलों को पैरों से छूने या लापरवाही से रखने से बचना चाहिए।
पूजा में फूलों की संख्या से अधिक श्रद्धा और स्वच्छता को महत्व दिया जाता है। इसलिए ताजे और साफ फूलों का ही इस्तेमाल करना उचित माना जाता है।
इस गलती से बचें
पारिजात के फूल को पाने के लिए पेड़ को जोर से हिलाना या फूल तोड़ना कई परंपराओं में उचित नहीं माना जाता। जमीन पर प्राकृतिक रूप से गिरे हुए ताजे फूलों को उठाकर पूजा में इस्तेमाल करने की परंपरा अधिक प्रचलित है।
साथ ही कई दिनों पुराने, सड़े-गले या गंदे फूल शिवलिंग पर नहीं चढ़ाने चाहिए। पारिजात से जुड़े ये नियम मुख्य रूप से धार्मिक परंपराओं और लोकमान्यताओं पर आधारित हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की परंपरा भिन्न हो सकती है।
Next Story