धर्म-अध्यात्म

सर्वपितृ अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये गलतियां

nidhi
5 Oct 2026 11:38 AM IST
सर्वपितृ अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये गलतियां
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सर्वपितृ अमावस्या
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। इसे पितृ पक्ष का अंतिम दिन कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज पृथ्वी लोक पर अपने वंशजों के बीच आते हैं और सर्वपितृ अमावस्या के दिन उनकी विदाई होती है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।
साल 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मानी जाएगी। सर्वपितृ अमावस्या उन पूर्वजों के श्राद्ध के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिनकी मृत्यु तिथि परिवार को ज्ञात नहीं होती। इसके अलावा किसी कारणवश पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए लोग भी इस दिन अपने पितरों के निमित्त तर्पण और श्राद्ध कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि पितरों की विदाई के समय गलत आचरण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता।
पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण की उपेक्षा न करें
मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष की अमावस्या पर पूर्वजों के निमित्त जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। तिल मिश्रित जल से तर्पण करने की परंपरा है। जिन लोगों के लिए विधिवत श्राद्ध करना संभव न हो, वे श्रद्धापूर्वक पूर्वजों को याद कर जल अर्पित कर सकते हैं।
घर आए जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं
सर्वपितृ अमावस्या के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक परंपराओं में अन्न, वस्त्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को उपयोगी वस्तुएं देने की परंपरा है। इस दिन किसी जरूरतमंद का अपमान करना उचित नहीं माना जाता।
भोजन का अनादर करने से बचें
पितृ पक्ष में अन्न को विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या पर भोजन बर्बाद नहीं करने और अन्न का अपमान नहीं करने की सलाह दी जाती है। श्राद्ध के लिए तैयार भोजन को श्रद्धा और स्वच्छता के साथ बनाने की परंपरा है।
क्रोध और विवाद से दूरी रखें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या पर घर में शांत वातावरण रखना चाहिए। परिवार के सदस्यों के साथ झगड़ा, अपशब्द या किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है। इस दिन पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने पर जोर दिया जाता है।
बुजुर्गों का अपमान न करें
भारतीय परंपरा में माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को पितरों के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या पर विशेष रूप से बुजुर्गों का सम्मान करने और उनका आशीर्वाद लेने की परंपरा है।
तामसिक भोजन से दूरी की मान्यता
श्राद्ध कर्म के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मांस-मदिरा और तामसिक भोजन से बचना चाहिए। कई परिवार प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं करते हैं।
दान करते समय दिखावा न करें
दान को धार्मिक परंपरा में श्रद्धा से जोड़ा गया है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या पर दान करते समय दिखावा करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद की सहायता करने की सलाह दी जाती है।
सर्वपितृ अमावस्या पर कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन देने की भी परंपरा है। कई क्षेत्रों में श्राद्ध के भोजन का एक हिस्सा इनके लिए निकाला जाता है। यह अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार बदल सकता है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पितरों की विदाई करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं पितरों के नाराज होने से जीवन में परेशानी आने की धारणा धार्मिक आस्था का हिस्सा है, इसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
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