धर्म-अध्यात्म

शनिदेव की पूजा में न करें ये बड़ी चूक, जानें तेल चढ़ाने का सही तरीका

Tara Tandi
4 July 2026 4:11 PM IST
शनिदेव की पूजा में न करें ये बड़ी चूक, जानें तेल चढ़ाने का सही तरीका
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Shanidev Niyam ज्योतिष न्यूज़: शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा से कई प्रकार के लाभ साधक को मिलते हैं। कहते हैं कि, इस दिन उपासना के साथ-साथ श्रद्धा भाव से शनिदेव को तेल अर्पित करने से भी वह प्रसन्न होते हैं। इसके प्रभाव से जीवन में चल रही परेशानियां, बाधाएं तथा नकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। खासतौर पर जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कमजोर शनि का प्रभाव चल रहा होता है, उनके लिए यह उपाय काफी लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि काले तिल या तिल के तेल से शनिदेव की पूजा करने पर कष्टों में राहत मिलने लगती है। हालांकि, कई बार लोग जानकारी के अभाव में गलत तरीके से शनिदेव को तेल अर्पित कर देते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। इसलिए शनिदेव की पूजा में सही नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। आइए जानते हैं कि शनिदेव को
तेल चढ़ाने का सही तरीका
क्या है।
शनिदेव को तेल चढ़ाने का सही नियम
शनिदेव को तेल चढ़ाते समय हमेशा लोहे के पात्र का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि लोहे का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है।
इस दौरान ध्यान रखें कि, तेल को सीधे शनिदेव की प्रतिमा पर नहीं डालना चाहिए। आप इसे किसी पात्र या दीपक पर चढ़ाएं।
आप चाहें, तो तेल को शनि शिला पर भी अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करना अधिक शुभ माना जाता है।
तेल अर्पित करते समय ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है।
इस समय एक विशेष बात का खास ध्यान रखें कि, आपकी आंखे शनिदेव के चरणों की ओर रहे, उनकी आंखों में सीधे देखने से बचना चाहिए।
इस तरीके से शनि देव को तेल चढ़ाने से जीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैं।
शनिदेव के प्रमुख मंत्र
शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।
शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।
शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।
शनिदेव को प्रसन्न करने वाले सरल मंत्र
"ॐ शं शनैश्चराय नमः"
"ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः"
"ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये। सय्योंरभीस्रवन्तुनः।।
शनि का पौराणिक मंत्र
ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
सामान्य मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
शनि का वैदिक मंत्र
ऊँ शन्नोदेवीर- भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
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