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धर्म-अध्यात्म
रक्षा पंचमी पर भूलकर भी न करें ये काम जानें व्रत और पूजा के नियम
nidhi
1 Sept 2026 11:25 AM IST

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रक्षा पंचमी
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में रक्षाबंधन के बाद आने वाली रक्षा पंचमी का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व रक्षाबंधन के करीब 5 दिन बाद भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश, नाग देवता और देवी-देवताओं की पूजा का विधान बताया गया है।
मान्यता है कि रक्षा पंचमी के दिन पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने से जीवन में सुख-शांति आती है और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
रक्षा पंचमी मनाने की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षा पंचमी का संबंध सुरक्षा और मंगल कामना से जुड़ा है। इस दिन भगवान से परिवार की रक्षा, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
कुछ क्षेत्रों में इसे ऋषि पंचमी से भी जोड़ा जाता है, हालांकि दोनों पर्वों की परंपराएं अलग-अलग हैं। अलग-अलग स्थानों पर रक्षा पंचमी मनाने की विधि में अंतर देखने को मिलता है।
रक्षा पंचमी के दिन क्या करें?
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
भगवान गणेश और इष्ट देवी-देवताओं की पूजा करें।
दीप जलाकर परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
जरूरतमंदों को दान करना शुभ माना जाता है।
घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें और धार्मिक पाठ करें।
इस दिन क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
किसी से वाद-विवाद और क्रोध करने से बचना चाहिए।
गलत कार्यों और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
पूजा-पाठ के दौरान अशुद्धता और लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
किसी का अपमान या दुख पहुंचाने से बचना चाहिए।
रक्षाबंधन से क्या है संबंध?
रक्षाबंधन में बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती है। वहीं रक्षा पंचमी को भी रक्षा और कल्याण की भावना से जुड़ा पर्व माना जाता है।
यह पर्व लोगों को परिवार, रिश्तों और आध्यात्मिक विश्वास के महत्व की याद दिलाता है।
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