धर्म-अध्यात्म

घटस्थापना के बाद भूलकर भी न करें ये 3 काम, जानें नवरात्रि के जरूरी नियम

nidhi
8 Oct 2026 12:13 PM IST
घटस्थापना के बाद भूलकर भी न करें ये 3 काम, जानें नवरात्रि के जरूरी नियम
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11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से होगी। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश स्थापना के माध्यम से मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। इसके बाद घर में पूजा-पाठ और व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इन नियमों की अनदेखी से पूजा के संकल्प में बाधा आ सकती है।
पहली गलती: घटस्थापना के बाद घर और अखंड ज्योति को अकेला छोड़ना
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, घटस्थापना के बाद कलश का सम्मान और उसकी नियमित देखभाल करना आवश्यक माना जाता है। कई परिवारों में यह मान्यता है कि कलश स्थापना के बाद घर को पूरी तरह बंद करके लंबे समय के लिए बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि घर में अखंड ज्योति जलाई गई है, तो उसकी देखभाल की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है। श्रद्धालु परंपरागत रूप से प्रयास करते हैं कि नवरात्रि के दौरान ज्योति लगातार जलती रहे।
हालांकि, अग्नि सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। जलते दीपक को बिना निगरानी के नहीं छोड़ना चाहिए। उसके आसपास कपड़े, कागज और अन्य ज्वलनशील वस्तुएं भी नहीं रखनी चाहिए।
दूसरी गलती: नवरात्रि में तामसिक भोजन का सेवन करना
शारदीय नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो श्रद्धालु व्रत रखते हैं या घर में कलश स्थापित करते हैं, उन्हें इन नौ दिनों में सात्विक आहार अपनाना चाहिए।
कई परिवारों में नवरात्रि के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज के सेवन से परहेज किया जाता है। इसके अलावा भोजन में स्वच्छता और संयम बनाए रखने पर भी जोर दिया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में सात्विक भोजन को मन की शांति और पूजा में एकाग्रता से जोड़ा गया है। हालांकि, खानपान से जुड़े नियम क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
तीसरी गलती: पूजा स्थल पर गंदगी रखना और नियमित पूजा नहीं करना
घटस्थापना के बाद पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। कलश के आसपास गंदगी, सूखे फूल, खराब पूजा सामग्री और अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, नवरात्रि में प्रतिदिन मां दुर्गा की पूजा, आरती और भोग अर्पित करने का विशेष महत्व है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करते हैं।
मान्यता है कि स्वच्छ वातावरण और नियमित आराधना से घर में सकारात्मकता बनी रहती है।
11 अक्टूबर को होगी घटस्थापना
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी।
उदया तिथि के अनुसार, घटस्थापना 11 अक्टूबर को की जाएगी। प्रकाशित पंचांग के अनुसार, सुबह 6 बजकर 32 मिनट से 10 बजकर 26 मिनट तक घटस्थापना का मुहूर्त बताया गया है। हालांकि, स्थान के अनुसार शुभ समय में अंतर हो सकता है।
नवरात्रि में घटस्थापना, अखंड ज्योति और मां दुर्गा की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालुओं को अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा करनी चाहिए। किसी भूल से पूरी पूजा स्वतः निष्फल हो जाती है, ऐसा कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
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