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धर्म-अध्यात्म
शारदीय नवरात्र में भूलकर भी न काटें बाल और नाखून, जानिए मान्यता
nidhi
4 Oct 2026 11:35 AM IST

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नवरात्र के 9 दिनों में बाल-नाखून काटने की क्यों है मनाही?
शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में शामिल है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त उपवास रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करते हैं। नवरात्र के दौरान खान-पान से लेकर दैनिक दिनचर्या तक कई नियमों का पालन करने की परंपरा है। इन्हीं में बाल और नाखून न काटने की मान्यता भी शामिल है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के नौ दिन साधना और आत्मसंयम के दिन माने जाते हैं। इस दौरान भक्त अपना अधिक से अधिक समय पूजा, ध्यान और धार्मिक गतिविधियों में लगाते हैं। बाल और नाखून काटने से परहेज करने की परंपरा को भी इसी संयम और साधना से जोड़कर देखा जाता है।
कई परिवारों में नवरात्र शुरू होने से पहले ही बाल और नाखून काटने की परंपरा है। इसके बाद नौ दिनों तक इन्हें काटने से बचा जाता है। हालांकि यह सभी समुदायों या परिवारों में अनिवार्य नियम नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में इसके पालन का तरीका अलग हो सकता है।
नवरात्र में शरीर और मन की शुद्धता पर विशेष जोर दिया जाता है। व्रत रखने वाले लोग सात्विक भोजन करते हैं और कई तरह के सांसारिक भोगों से दूरी बनाए रखते हैं। कुछ श्रद्धालु इस दौरान ब्रह्मचर्य, संयम और नियमित पूजा का पालन भी करते हैं। बाल और नाखून न काटना इसी अनुशासित दिनचर्या का एक हिस्सा माना जाता है।
इसके पीछे स्वच्छता से जुड़ा एक व्यावहारिक पहलू भी बताया जाता है। पुराने समय में बाल या नाखून काटने के लिए आज जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान शरीर को प्राकृतिक अवस्था में रखने और अनावश्यक गतिविधियों से बचने की परंपरा विकसित हुई। समय के साथ यह धार्मिक आचार का हिस्सा बन गई।
नवरात्र के दौरान कुछ अन्य कार्यों से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है। तामसिक भोजन, नशे और अत्यधिक भोग-विलास से दूर रहने की परंपरा है। कई लोग प्याज-लहसुन तक का सेवन नहीं करते। हालांकि खान-पान के नियम भी परिवार, क्षेत्र और व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग हो सकते हैं।
व्रत रखने वाले लोगों के लिए शरीर को पर्याप्त आराम और पोषण देना भी जरूरी है। निर्जला या लंबे समय के उपवास करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। किसी बीमारी, कमजोरी या अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में केवल धार्मिक परंपरा के कारण स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नवरात्र के दौरान बाल और नाखून काटने की मनाही को लेकर वैज्ञानिक रूप से कोई निश्चित निषेध स्थापित नहीं है। यह मुख्य रूप से धार्मिक और पारंपरिक मान्यता है। इसलिए इसे आस्था और पारिवारिक परंपरा के संदर्भ में समझना उचित है।
इन नौ दिनों का मुख्य उद्देश्य भक्तों के लिए मां दुर्गा की आराधना, आत्मसंयम और सकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित करना है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार नियमों का पालन करते हैं। नवरात्र समाप्त होने के बाद सामान्य दिनचर्या के अनुसार बाल और नाखून काटे जाते हैं।
इस तरह शारदीय नवरात्र में बाल और नाखून न काटने की परंपरा धार्मिक अनुशासन और संयम से जुड़ी मानी जाती है। यह हर व्यक्ति के लिए समान रूप से अनिवार्य नियम नहीं है, बल्कि अलग-अलग परिवारों और समुदायों में चली आ रही आस्था की परंपरा है। नवरात्र के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, संयम और अपनी परंपराओं के अनुसार मां दुर्गा की पूजा करना माना जाता है।
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