- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- जन्माष्टमी पर करें...
जन्माष्टमी पर करें भगवान श्रीकृष्ण की षोडशोपचार पूजन विधि, जानें शुभ मुहूर्त
पंचाग के अनुसार, जन्माष्टमी का पर्व 18 अगस्त और आज मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 18 अगस्त रात 9 बजकर 21 मिनट से शुरू हो रही है जो आज अगस्त को रात 10 बजकर 59 मिनट तक होगी। इसके साथ ही 19 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र रात के समय लग रहा है। ऐसे में 19 को जन्माष्टमी मनाना शुभ होगा। जानिए कृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त और षोडशोपचार पूजन विधि।
Janmashtami 2022: जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा करते समय ध्यान रखें ये बातें, मिलेगा पूजा का पूर्ण फल
जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 18 अगस्त को रात्रि 9 बजकर 21 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो रही है जो 19 अगस्त को रात्रि 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 19 अगस्त को रात 01 बजकर 54 मिनट पर हो रहा है। ऐसे में 18 अगस्त को गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए सबसे अच्छा माना जा रहा है।
Janmashtami 2022 Date: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज या कल? जानिए शुभ मुहूर्त
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा बताते हैं कि जैसा कि नाम से पता चलता है कि षोडशोपचार यानी 16 तरीकों से पूजन करना। जन्माष्टमी की इस षोडषोपचार पूजा विधि में सोलह चरण शामिल होते हैं। इन सभी चरणों के बारे में नीचे विस्तार से बताया जाएगा। जानिए जन्माष्टमी के दिन कैसे करें भगवान कृष्ण की षोडशोपचार पूजन।
जन्माष्टमी के दिन ऐसे करें श्रीकृष्ण की पूजा
पंडित मनीष शर्मा के अनुसार, सबसे पहले बाल कृष्ण की मूर्ति को एक बर्तन में रखें और उसे शुद्ध जल और दूध, दही, शहद, पंचमेवा और सुगंध युक्त गंगा जल से स्नान कराएं। फिर पालने में स्थापित करें और वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान के विधान के अनुसार आरती करें। अंत में उन्हें नैवेद्य यानी फलों और मिठाइयों के साथ-साथ अपनी परंपरा के अनुसार धनिया, आटा, चावल या पंच ड्राई फ्रूट्स की पंजीरी शामिल करें।
भगवान पर इत्र जरूर लगाएं। पंचामृत स्नान के बाद षोडशोपचार पूजा की जाती है। श्री कृष्ण की जयंती मनाने के लिए मंदिरों में इस पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है। इसके बाद रात्रि जागरण करते हुए सामूहिक रूप से भगवान की स्तुति की जाती है। इन सभी 16 चरणों में सोलह मंत्र हैं, सोलहवें मंत्र को प्रभु की आरती कहते हैं।





