धर्म-अध्यात्म

स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी की कहानी जानें रामानुजाचार्य को क्यों समर्पित है स्मारक

nidhi
3 Sept 2026 2:22 PM IST
स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी की कहानी जानें रामानुजाचार्य को क्यों समर्पित है स्मारक
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श्री रामानुजाचार्य को समर्पित स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी का महत्व

हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में स्थित 'स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी' दुनिया के सबसे चर्चित आध्यात्मिक स्मारकों में से एक है। 216 फीट ऊंची यह विशाल प्रतिमा 11वीं सदी के महान भारतीय दार्शनिक, संत और समाज सुधारक श्री रामानुजाचार्य को समर्पित है। यह स्मारक उनके समानता, भक्ति और मानव कल्याण के विचारों को सम्मान देने के लिए बनाया गया है।

यह प्रतिमा हैदराबाद के मुचिंतल क्षेत्र में स्थित है और इसे रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती के अवसर पर तैयार किया गया था। इसका उद्घाटन 5 फरवरी 2022 को किया गया था।
रामानुजाचार्य कौन थे?
श्री रामानुजाचार्य भारत के महान दार्शनिकों और संतों में गिने जाते हैं। उन्होंने विशिष्टाद्वैत वेदांत दर्शन को आगे बढ़ाया और भक्ति मार्ग को नई दिशा दी।
उनका मानना था कि ईश्वर की भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान का अधिकार हर व्यक्ति को होना चाहिए। उन्होंने समाज में समानता और मानव सम्मान का संदेश दिया, इसी कारण इस प्रतिमा का नाम 'स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी' रखा गया।
216 फीट ऊंची प्रतिमा की खासियत
स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी बैठी हुई मुद्रा में बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल है। यह प्रतिमा पंचधातु से तैयार की गई है और इसकी भव्यता दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करती है।
इसकी ऊंचाई को भी प्रतीकात्मक माना जाता है। प्रतिमा परिसर में रामानुजाचार्य के जीवन, दर्शन और शिक्षाओं को समझाने के लिए कई सुविधाएं बनाई गई हैं।
परिसर में मौजूद हैं 108 दिव्य देशम
इस स्मारक की एक बड़ी खासियत यहां बने 108 दिव्य देशम मंदिरों के मॉडल हैं। ये भगवान विष्णु से जुड़े पवित्र मंदिरों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह पूरा परिसर आध्यात्मिक अनुभव के साथ भारतीय संस्कृति और वास्तुकला की झलक भी दिखाता है।
अंदर मौजूद है 120 किलो सोने की प्रतिमा
स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी परिसर के अंदर रामानुजाचार्य की एक छोटी स्वर्ण प्रतिमा भी स्थापित है। यह प्रतिमा करीब 120 किलोग्राम सोने से बनी है और इसे पूजा व ध्यान के केंद्र के रूप में देखा जाता है।
समानता का संदेश देता है स्मारक
रामानुजाचार्य ने अपने जीवन में सामाजिक भेदभाव को कम करने और सभी लोगों को आध्यात्मिक मार्ग से जोड़ने का प्रयास किया।
इसी विचार को ध्यान में रखते हुए यह स्मारक केवल एक विशाल प्रतिमा नहीं बल्कि समानता, मानवता और सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है।
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
आज स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी हैदराबाद के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग दर्शन और भारतीय दर्शन को समझने के लिए पहुंचते हैं।
यह स्मारक आधुनिक निर्माण तकनीक और भारतीय आध्यात्मिक विरासत का अनोखा संगम प्रस्तुत करता है।
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