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धर्म-अध्यात्म
शनि की साढ़े साती और ढैय्या में फर्क, जानें खास उपाय
Tara Tandi
7 Sept 2025 5:14 PM IST

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ज्योतिष न्यूज़: शनिदेव को कर्मफल कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि को सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं। इसी कारण शनि को एक राशि चक्र पूरा करने में लगभग 30 वर्ष लगते हैं। आपने सुना होगा कि शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का नाम सुनते ही लोग परेशान हो जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव आर्थिक और शारीरिक कष्ट बढ़ाने वाला माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शनि जिस राशि में स्थित होते हैं, उस राशि को हमेशा कष्ट ही होता है, बल्कि कई बार शनि का प्रभाव लाभ के साथ-साथ हानि भी देता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या क्या होती है और इनमें क्या अंतर होता है?
शनि की साढ़ेसाती तब शुरू होती है जब शनि आपकी जन्म राशि से बारहवें, पहले और फिर दूसरे भाव में गोचर करते हैं। यह लगभग साढ़े सात वर्षों तक चलती है। इस दौरान जीवन में बड़े बदलाव आते हैं। कभी-कभी ये बदलाव सकारात्मक से ज़्यादा नकारात्मक होते हैं। जैसे, करियर में उतार-चढ़ाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और धन की कमी।
शनि की साढ़ेसाती से मुक्ति के उपाय
शनिवार के दिन सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर शनि के लिए दान लेने वाले व्यक्ति को दान करना चाहिए। अगर कोई दान लेने वाला व्यक्ति न मिले, तो तेल में अपना चेहरा देखकर पीपल के पेड़ के नीचे रख दें।
हर शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाकर शनिदेव से अपने किए गए दोषों के लिए क्षमा याचना करनी चाहिए।
हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
शनिवार के दिन शनि की पूजा करें और काले तिल व काले वस्त्र दान करें।
शनि की ढैय्या क्या है?
जब जन्म कुंडली में शनि चौथे या आठवें भाव में होता है, तो ढैय्या होती है। यह लगभग ढाई साल तक रहती है। इस दौरान मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ और धन की कमी हो सकती है। ढैय्या का अर्थ है शनि का अशुभ प्रभाव। इसे साढ़ेसाती से कम कष्टकारी माना जाता है।
शनि की ढैय्या से मुक्ति के उपाय
हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि की ढैय्या से राहत मिलती है।
भगवान शिव की पूजा करें और शिव मंत्र का जाप करें।
पशुओं की सेवा करने से शनि की ढैय्या से राहत मिलती है। गाय, कुत्ता, कौआ आदि जानवरों को रोटी खिलानी चाहिए।
गरीबों और ज़रूरतमंदों को भोजन दान करना चाहिए।
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में मुख्य अंतर
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या, दोनों ही शनि से संबंधित समयावधियाँ हैं। साढ़ेसाती लंबी होती है और ढैय्या छोटी होती है। साढ़ेसाती का प्रभाव अधिक गहरा होता है, जबकि ढैय्या का प्रभाव कम होता है। साढ़ेसाती लंबे समय तक रहती है। ढैय्या थोड़े समय के लिए होती है।
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