धर्म-अध्यात्म

धनतेरस 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त और खरीदारी के खास नियम

nidhi
5 Nov 2026 7:22 AM IST
धनतेरस 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त और खरीदारी के खास नियम
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Dhanteras 2026: हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व दीपावली से पहले मनाया जाता है और इसे सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति तथा अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में पूजा और कुछ विशेष वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा तथा सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस वर्ष धनतेरस का त्योहार शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
धनतेरस के दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन और झाड़ू खरीदने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इन वस्तुओं की खरीदारी शुभ होती है। हालांकि, किसी वस्तु को खरीदने से धन बढ़ने की गारंटी नहीं होती। यह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा विश्वास है।
धनतेरस 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस मनाई जाती है।
- धनतेरस की तारीख: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर, सुबह लगभग 10:30 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह लगभग 10:47 बजे
- नई दिल्ली में पूजा मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक
- रायपुर में पूजा मुहूर्त: शाम लगभग 5:58 बजे से 7:56 बजे तक
पूजा का सटीक समय शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है।
धनतेरस पर इन चीजों की खरीदारी मानी जाती है शुभ
1. सोना और चांदी: धनतेरस पर सोने और चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें माता लक्ष्मी की कृपा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
2. पीतल के बर्तन: इस दिन पीतल के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए बर्तन खरीदने की परंपरा का विशेष महत्व है।
3. नई झाड़ू: धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। इसे घर की स्वच्छता और दरिद्रता दूर करने की प्रतीकात्मक मान्यता से जोड़ा जाता है।
4. साबुत धनिया: कई परिवारों में धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदकर माता लक्ष्मी को अर्पित किया जाता है। इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
5. लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा: दीपावली पूजन के लिए धनतेरस पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई प्रतिमा खरीदना भी शुभ माना जाता है।
धनतेरस की संपूर्ण पूजा विधि
धनतेरस के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर तथा पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और दीपक जलाएं।
शाम के समय शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
इसके बाद दीपक जलाकर गणेश जी का स्मरण करें। सभी देवी-देवताओं को फूल, अक्षत, रोली, चंदन और मिठाई अर्पित करें।
भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें। माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
पूजा के दौरान श्रद्धालु 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और 'ॐ कुबेराय नमः' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
अंत में आरती करें और परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
धनतेरस पर यम दीपदान का विशेष महत्व
धनतेरस की शाम यम दीपदान करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अनिष्ट से रक्षा और परिवार की मंगलकामना के लिए किया जाता है। परंपरागत रूप से आटे या मिट्टी का दीपक बनाकर उसमें सरसों का तेल डाला जाता है। इसके बाद घर के बाहर सुरक्षित स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाया जाता है।
धनतेरस पर किन बातों का रखें ध्यान?
धनतेरस पर खरीदारी करते समय अपनी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। केवल धार्मिक मान्यताओं के कारण महंगी वस्तुएं खरीदना जरूरी नहीं है। सोना-चांदी खरीदते समय शुद्धता और हॉलमार्क की जांच करें। पूजा में साफ-सफाई, श्रद्धा और परिवार की सुख-शांति को प्राथमिकता दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल धन प्राप्त करना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक जीवन की कामना करना भी है।
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