धर्म-अध्यात्म

Devuthani Ekadashi 2025: सूर्य की चाल खराब, शादी वर्जित

Harrison
28 Oct 2025 8:07 PM IST
Devuthani Ekadashi 2025: सूर्य की चाल खराब, शादी वर्जित
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म: भारतीय पंचांग और ज्योतिष के अनुसार, विवाह मुहूर्त का चयन किसी भी जोड़े के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शुभ मुहूर्त न केवल नए जीवन की शुरुआत को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक समृद्धि के लिए भी लाभकारी माना जाता है। हर वर्ष, देवउठनी एकादशी को विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इसे देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु की चार माह की योगिनी नींद समाप्त होती है और वे पुनः जागते हैं।
लेकिन, इस बार 2025 में देवउठनी एकादशी पर सूर्य की चाल (सूर्य की स्थिति और उसकी ग्रह स्थिति) ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ नहीं मानी जा रही है। इस कारण, विवाह या किसी भी मांगलिक कार्य को इस दिन करने से वर्जित रहने की चेतावनी दी गई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य की अशुभ स्थिति से नई शुरुआत और विवाह संबंधी कार्यों में बाधा आ सकती है। इस स्थिति में शादी के शुभ मुहूर्त का चयन करने के लिए अन्य दिनों को प्राथमिकता देना अधिक सुरक्षित और लाभकारी होगा।
देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व
देवउठनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसे “उत्थान एकादशी” भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु अपनी योगिनी नींद से जागते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु की नींद और जागरण का सीधा संबंध प्रकृति और जीवन चक्र से जुड़ा है। इस दिन उपवास, धार्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजा करने का रिवाज है। कई परिवार इस दिन को विशेष रूप से अपने घर में धार्मिक गतिविधियों और मंदिरों में पूजा पाठ के लिए चुनते हैं।
विवाह मुहूर्त पर प्रभाव
वर्तमान ज्योतिषीय गणना के अनुसार, देवउठनी एकादशी 2025 में सूर्य की चाल अशुभ स्थिति में है। सूर्य ग्रह की स्थिति को जीवन में स्थिरता, सफलता और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब सूर्य की चाल अनुकूल नहीं होती, तो नए कार्य जैसे विवाह, व्यवसाय की शुरुआत, मकान खरीदना या अन्य मांगलिक आयोजन में बाधा आ सकती है। इसलिए, इस दिन विवाह करने की बजाय अन्य शुभ दिनों का चयन करने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिषियों की राय
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, देवउठनी एकादशी पर सूर्य की अशुभ चाल का असर विशेष रूप से दांपत्य जीवन और पारिवारिक सुख-शांति पर पड़ सकता है। इस कारण, विवाह और मांगलिक अनुष्ठानों को इस दिन टालकर बाद के किसी शुभ मुहूर्त में किया जाना चाहिए। वैवाहिक योजनाओं के लिए वैकल्पिक शुभ दिन और समय का चयन करना हमेशा सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है।
सुझाव और सावधानियां
विवाह योजना बनाने वाले परिवारों को देवउठनी एकादशी 2025 पर शादी से बचने की सलाह दी जाती है।
वैवाहिक अनुष्ठान या मांगलिक कार्यों के लिए अन्य शुभ मुहूर्त और तारीखें ज्योतिषीय सलाहकार से लेकर ही निश्चित करें।
धार्मिक कार्यक्रम, पूजा और उपवास जैसे परंपरागत कार्य इस दिन किए जा सकते हैं, क्योंकि ये अशुभ प्रभाव से मुक्त हैं।
भविष्य के विवाह मुहूर्त के लिए पंचांग और विशेषज्ञ ज्योतिषियों की सलाह समय से प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार, देवउठनी एकादशी 2025 के दिन सूर्य की चाल खराब होने के कारण विवाह या मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। यह निर्णय परिवार के लिए दीर्घकालिक सुख-शांति और विवाह में सफलता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन धार्मिक क्रियाओं और पूजा-पाठ में संलग्न रहना उत्तम विकल्प है। विवाह कार्य के लिए परिवारों को अन्य शुभ तिथियों का चयन करना चाहिए, जिससे नई शुरुआत लाभकारी और सुरक्षित हो सके।
इस साल, देवउठनी एकादशी का महत्व भले ही धार्मिक दृष्टि से उच्च है, लेकिन विवाह और मांगलिक आयोजनों के लिए यह दिन वर्जित रहेगा। परिवारों को इससे अवगत होना और वैकल्पिक शुभ तिथियों की योजना बनाना आवश्यक है।
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