धर्म-अध्यात्म

Devuthani Ekadashi 2025: शुभ मुहूर्त और तुलसी विवाह का महत्व

Harrison
26 Oct 2025 7:42 PM IST
Devuthani Ekadashi 2025: शुभ मुहूर्त और तुलसी विवाह का महत्व
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी 2025 इस वर्ष 9 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसे एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा और तुलसी विवाह के साथ विशेष रूप से मनाया जाता है। यह दिन खासकर पवित्र और धार्मिक महत्व के कारण सभी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
देवउठनी एकादशी को देवोत्त्थान एकादशी भी कहा जाता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीनों की नींद (चतुर्मास) से जागते हैं और धरती पर उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन को रवि योग में पड़ने के कारण इसे और भी अधिक शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और व्रत रखने से जीवन में समृद्धि, सुख-शांति और खुशहाली आती है।
पंडितों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, देवउठनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी होता है। इस दिन तुलसी के पौधे की पूजा और तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है। तुलसी विवाह के दौरान तुलसी को भगवान विष्णु के रूप में माना जाता है और विवाह के माध्यम से तुलसी और विष्णु का पवित्र बंधन स्थापित किया जाता है। इसे करने से परिवार में सौभाग्य और घर की समृद्धि बढ़ती है।
इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, देवउठनी एकादशी का प्रारंभिक समय प्रातः 6:30 बजे से शुरू होता है और दिनभर तक पूजा और व्रत का पालन किया जा सकता है। तुलसी विवाह के लिए विशेष मुहूर्त दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक माना गया है। इस समय के दौरान तुलसी विवाह और भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
व्रत करने वाले लोग दिनभर निर्जला व्रत रखते हैं, अर्थात वे पूरे दिन भोजन नहीं करते और केवल जल पीते हैं। इसके अलावा, भक्त भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, भजन और कीर्तन में दिन बिताते हैं। कई लोग इस दिन विशेष रूप से विष्णु मंदिरों में जाकर पूजा करते हैं और दान-पुण्य भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन किया गया दान और पूजा पूरे वर्ष के लिए पुण्यकारी सिद्ध होता है।
विशेषकर तुलसी विवाह का महत्व भी अत्यधिक है। तुलसी को पवित्र माना जाता है और इसे विष्णु के आवास और प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। तुलसी विवाह करने से परिवार में सौभाग्य, सुख और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। इसे करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह का पालन करने से ना केवल धार्मिक कर्तव्य पूरा होता है, बल्कि जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी मिलती है। इसके साथ ही यह व्रत और पूजा पर्यावरण के प्रति सम्मान और पौधों की पवित्रता की भावना भी सिखाता है।
संक्षेप में, देवउठनी एकादशी 2025 एक पवित्र और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण दिन है। रवि योग में पड़ने के कारण यह और भी अधिक शुभ है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी विवाह और व्रत का पालन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे इस दिन का पूरा लाभ उठाएं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा और व्रत करें।
इस प्रकार, देवउठनी एकादशी का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन हमें पवित्रता, श्रद्धा और आध्यात्मिकता की सीख देता है।
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