धर्म-अध्यात्म

2000 साल पुराने मंदिर में उमड़ी श्रद्धा, 5100 लीटर दूध से हुआ मां लक्ष्मी का अभिषेक

Rajeshwari Nishad
8 Nov 2026 5:49 PM IST
2000 साल पुराने मंदिर में उमड़ी श्रद्धा, 5100 लीटर दूध से हुआ मां लक्ष्मी का अभिषेक
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उज्जैन। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी की भक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिला। शहर के करीब 2 हजार साल पुराने मां गजलक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दौरान माता का 5100 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। मंदिर के गर्भगृह और दरबार को नोटों तथा रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक तरीके से सजाया गया। दीपावली के अवसर पर माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य मां गजलक्ष्मी को अपनी राजलक्ष्मी मानकर उनकी पूजा-अर्चना करते थे।
दीपावली को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। ऐसे में उज्जैन के इस प्राचीन मंदिर में होने वाला आयोजन श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है। हर साल दीपावली के अवसर पर मंदिर में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस बार भी भव्य आयोजन के जरिए माता के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिली।
5100 लीटर दूध से किया गया माता का अभिषेक
दीपावली के पावन अवसर पर मां गजलक्ष्मी मंदिर में विशेष अभिषेक का आयोजन किया गया। इस दौरान माता की प्रतिमा का 5100 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ भाग लिया।मां लक्ष्मी की पूजा में अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार माता को विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। उज्जैन के इस मंदिर में इतने बड़े स्तर पर दूध से अभिषेक किए जाने की परंपरा इसे विशेष बनाती है।अभिषेक के दौरान मंदिर में धार्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
नोटों और फूलों से सजाया गया मां का दरबार
दीपावली के अवसर पर मंदिर की सजावट भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। मां गजलक्ष्मी के दरबार को नोटों और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया।मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है। इसलिए दीपावली पर उनके मंदिर को मुद्रा और फूलों से सजाने की परंपरा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रखती है।मंदिर में की गई सजावट के बीच माता का श्रृंगार भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना। श्रद्धालु सजाए गए दरबार में माता के दर्शन करने पहुंचे और पूजा-अर्चना की।दीपावली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने का उद्देश्य केवल धन प्राप्ति नहीं, बल्कि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना भी है।
2 हजार साल पुराना बताया जाता है मंदिर का इतिहास
उज्जैन का मां गजलक्ष्मी मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इसे करीब 2 हजार साल पुराना बताया जाता है। मंदिर का संबंध सम्राट विक्रमादित्य की धार्मिक आस्था से भी जोड़ा जाता है।मान्यता है कि सम्राट विक्रमादित्य मां गजलक्ष्मी को अपनी राजलक्ष्मी मानते थे और नियमित रूप से उनकी पूजा-अर्चना करते थे। इसी कारण इस मंदिर को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है।गजलक्ष्मी स्वरूप में मां लक्ष्मी की पूजा धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की कामना के साथ की जाती है। मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताएं उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं।हालांकि, मंदिर की दो हजार वर्ष पुरानी आयु और सम्राट विक्रमादित्य से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि के लिए प्रमाणिक अभिलेखों की आवश्यकता है।
सम्राट विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी मानी जाती हैं मां गजलक्ष्मी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य मां गजलक्ष्मी को अपनी राजलक्ष्मी के रूप में पूजते थे। माना जाता है कि वे राज्य की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए माता का आशीर्वाद लेते थे।गजलक्ष्मी मां लक्ष्मी का एक विशेष स्वरूप हैं। इस स्वरूप में देवी को ऐश्वर्य, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। दीपावली पर विशेष रूप से मां महालक्ष्मी की आराधना होती है। वहीं, गजलक्ष्मी स्वरूप की पूजा भी धन और समृद्धि की कामना से जुड़ी हुई है।उज्जैन के इस प्राचीन मंदिर में सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ी मान्यताएं इसकी धार्मिक पहचान को और विशेष बनाती हैं।
दीपावली पर उज्जैन में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था
उज्जैन को देश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अनेक प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। दीपावली के अवसर पर शहर के मंदिरों में विशेष पूजा और सजावट की जाती है।मां गजलक्ष्मी मंदिर में भी विशेष अभिषेक और भव्य सजावट ने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। भक्तों ने माता के दर्शन कर दीपावली की खुशियां मनाईं और परिवार की उन्नति की कामना की।मंदिर में आयोजित 5100 लीटर दूध के अभिषेक और नोटों से सजे दरबार की चर्चा इस विशेष आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही।
धन और समृद्धि की कामना के साथ हुई पूजा
दीपावली पर मां लक्ष्मी की आराधना को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।मां गजलक्ष्मी मंदिर में हुए विशेष आयोजन ने इस धार्मिक मान्यता को एक बार फिर चर्चा में ला दिया। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया।कुल मिलाकर, उज्जैन के करीब 2 हजार साल पुराने माने जाने वाले मां गजलक्ष्मी मंदिर में दीपावली का आयोजन भव्य और आकर्षक रहा। 5100 लीटर दूध से अभिषेक, नोटों और फूलों से सजे दरबार तथा सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं ने इस आयोजन को खास बना दिया।
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