धर्म-अध्यात्म

19 दिसंबर 2025, साल की खास Paush Amavasya, जानें शुभ मुहूर्त और योग

Harrison
18 Dec 2025 7:26 PM IST
19 दिसंबर 2025, साल की खास Paush Amavasya, जानें शुभ मुहूर्त और योग
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Religion, Spirituality, धर्म अध्यात्म : 19 दिसंबर 2025 को हिंदू पंचांग के अनुसार पौष मास की अमावस्या है। यह साल की अंतिम अमावस्या होने के कारण विशेष महत्व रखती है। हिंदू धर्म में अमावस्या को पितृ कर्म, दान‑धर्म, स्नान और मंत्र जाप के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से पितरों की शांति के लिए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पौष अमावस्या का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह साल की आखिरी अमावस्या है और इसे पितृदोष निवारण और पारिवारिक सुख‑समृद्धि के लिए श्रेष्ठ दिन माना जाता है।
इस वर्ष की पौष अमावस्या 19 दिसंबर को सुबह 04:59 बजे से शुरू होकर 20 दिसंबर सुबह 07:12 बजे तक रहेगी। यह समय धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उत्तम माना जाता है। पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:19 बजे से 6:14 बजे तक रहेगा, जो स्नान, ध्यान और मंत्र जाप के लिए सबसे शुभ समय है। इसी तरह, अमृत काल सुबह 9:43 बजे से 11:01 बजे तक रहेगा, जिसमें किए गए दान और पूजा का विशेष फल माना जाता है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:58 बजे से 12:39 बजे तक रहेगा, जो आमतौर पर सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम समय माना जाता है। वहीं, राहु काल 11:01 बजे से 12:18 बजे तक है, इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
पौष अमावस्या के दिन स्नान और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने से पितृ शांति और जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है। दान‑धर्म जैसे भोजन, वस्त्र और अन्न का दान विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसके अलावा, पितरों के लिए तरपण और पिंडदान की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है। मंत्र जाप और ध्यान के माध्यम से आत्मिक शांति का अनुभव किया जा सकता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से इस वर्ष की अमावस्या विशेष ग्रह योगों के साथ आ रही है। गुरु और शुक्र की युति तथा सूर्य‑मंगल संयोग जैसी स्थितियाँ बन रही हैं, जो कुछ राशियों के लिए धन, लाभ और सौभाग्य के संकेत देती हैं। ये शुभ योग पूजा‑पाठ को और अधिक फलदायक बनाते हैं। इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान परिवार में सुख‑समृद्धि, पितृदोष निवारण और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं।
इस दिन पूजा करते समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना, काले तिल और जल से पितरों को तर्पण देना, जरूरतमंदों को अनाज या वस्त्र दान करना शुभ फलदायक माना जाता है। इसके अलावा, कुछ लोग निर्जला व्रत या फलाहार व्रत भी रखते हैं, जो धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पौष अमावस्या का सही समय और शुभ मुहूर्त देखकर किए गए अनुष्ठान अत्यंत फलदायक होते हैं। इस दिन किए गए दान और पूजा का प्रभाव जीवन में आर्थिक, पारिवारिक और आध्यात्मिक स्तर पर दिखाई देता है। इसलिए भक्तजन इस दिन का लाभ उठाने के लिए सुबह के समय विशेष सत्संग, मंत्र जाप और धार्मिक क्रियाओं में भाग लेते हैं।
संक्षेप में, 19 दिसंबर 2025 की पौष अमावस्या न केवल हिंदू पंचांग की एक महत्वपूर्ण तिथि है, बल्कि यह शुभ मुहूर्त और ग्रह योगों के कारण विशेष आध्यात्मिक अवसर भी प्रदान करती है। इस दिन की पवित्रता और परंपरागत कर्मों का पालन करने से पितृ शांति, पारिवारिक सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। धार्मिक विशेषज्ञ और पंचांग सलाहकार इस दिन उपयुक्त समय और विधि के अनुसार पूजा‑पाठ करने की सलाह देते हैं, जिससे सभी प्रकार के लाभ और पुण्य की प्राप्ति संभव हो।
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