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धर्म-अध्यात्म
कर्क संक्रांति पर दक्षिणायन की शुरुआत, सूर्य को अर्घ्य देने से होगा लाभ
jantaserishta.com
15 July 2025 9:20 AM IST

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नई दिल्ली: बुधवार के दिन सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इसी घटना को कर्क संक्रांति कहा जाता है, और यह दक्षिणायन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। अगले छह महीने तक सूर्य दक्षिणी गोलार्ध की ओर यात्रा करेंगे। इस दिन सूर्य और विष्णु भगवान की पूजा का प्रावधान होता है।
दृक पंचांग के अनुसार, बुधवार की शाम करीब 5 बजकर 40 मिनट तक सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, वहीं चंद्रमा मीन राशि में रहेंगे। इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है और राहुकाल काल का समय दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 02 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
इस दिन सूर्य उत्तरी गोलार्ध से दक्षिणी गोलार्ध की ओर यात्रा शुरू करते हैं; उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात माना जाता है। अग्नि पुराण के अनुसार, कर्क संक्रांति से लेकर मकर संक्रांति तक का समय देवताओं का शयन काल माना जाता है। इस अवधि में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि नहीं किए जाते हैं, हालांकि कुछ विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान किए जा सकते हैं।
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने और सूर्य देव की उपासना करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। अन्न, वस्त्र, जल और तिल का दान करना शुभ माना जाता है।
कर्क संक्रांति पर सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। सूर्य मंत्रों का जाप, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और सूर्य को अर्घ्य देना विशेष फलदायी होता है। साथ ही, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा भी शुभ मानी जाती है।
इस दिन आप सुबह व्रत भी रख सकते हैं और विधि-विधान से पूजा-पाठ भी कर सकते हैं। इस दिन आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें, उसके बाद एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें, और तांबे के बर्तन में जल भरकर उसमें फूल, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने और सूर्य देव के मंत्र "ऊं सूर्याय नमः" या "ऊं घृणि सूर्याय नमः" का जप करने से भी विशेष लाभ मिलता है। इन उपायों को करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता मिलती है।
एक समय भोजन करें, जिसमें नमक का सेवन न करें। गरीबों को दान करें। इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना, तेल मालिश करना और तांबे के बर्तन बेचना भी वर्जित माना गया है।
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