धर्म-अध्यात्म

दही हांडी 2026: जानिए इस पावन पर्व का धार्मिक महत्व

Tara Tandi
3 Sept 2026 6:56 PM IST
दही हांडी 2026: जानिए इस पावन पर्व का धार्मिक महत्व
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ज्योतिष न्यूज़: जन्माष्टमी की रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने के बाद अगले दिन दही हांडी का पर्व मनाया जाता है। कई जगह इसे गोपालकाला भी कहा जाता है। आज यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ एकता, साहस, टीमवर्क और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बन चुका है। इस दिन गोविंदा पथक ऊंचाई पर बांधी गई मटकी तक पहुंचने के लिए मानव पिरामिड बनाते हैं। इस साल दही हांडी 5 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं इस पर्व का महत्व और
पौराणिक मान्यताएं
कान्हा की माखन चोरी से जुड़ी है कहानी
दही हांडी की परंपरा को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि बाल गोपाल को माखन और दही बहुत प्रिय था। गोकुल की महिलाएं मटकी में दही-माखन भरकर उसे ऊंचाई पर टांग देती थीं, ताकि बच्चे उसे आसानी से न निकाल सकें।
कृष्ण अपने सखाओं के साथ मिलकर मानव पिरामिड बनाते और मटकी तक पहुंचकर उसे फोड़ देते थे। इसके बाद सभी मिलकर उसमें रखा माखन-दही खाते थे। आज दही हांडी में मटकी फोड़ने की परंपरा को कान्हा की इसी नटखट लीला की याद माना जाता है।
जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों मनाते हैं?
जन्माष्टमी की रात कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है, जबकि अगले दिन उनकी बाल लीलाओं को याद करने की परंपरा है। माखन और दही से जुड़ी कान्हा की शरारतें उनकी सबसे लोकप्रिय बाल लीलाओं में शामिल हैं। इसी वजह से दही हांडी जन्माष्टमी के अगले दिन मनाई जाती है।
महाराष्ट्र में कैसे बनी बड़ी परंपरा?
दही हांडी का सबसे भव्य रूप महाराष्ट्र में देखने को मिलता है। मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे शहरों में यह बड़े सार्वजनिक आयोजन का रूप ले चुका है। अलग-अलग इलाकों में गोविंदा मंडल बनते हैं और मटकी फोड़ने की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
ढोल-ताशों और संगीत के बीच टीमें कई स्तरों वाली मानव पिरामिड बनाकर हांडी तक पहुंचती हैं। कई आयोजनों में विजेता टीमों को पुरस्कार भी दिए जाते हैं।
दही हांडी का संदेश
दही हांडी सिर्फ मटकी फोड़ने का उत्सव नहीं है। यह मिल-जुलकर लक्ष्य हासिल करने, एक-दूसरे पर भरोसा रखने और सहयोग करने की सीख देता है। मानव पिरामिड में सबसे ऊपर पहुंचने वाला गोविंदा तभी सफल होता है, जब पूरी टीम मजबूती से उसका साथ देती है। यही संदेश दही हांडी को आज भी खास और लोकप्रिय बनाता है।
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