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धर्म-अध्यात्म
सावन सोमवार और प्रदोष व्रत को लेकर भ्रम दूर करें, यहां जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
nidhi
5 Aug 2026 10:25 AM IST

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सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक साथ पड़ें तो क्या करें?
सावन सोमवार और प्रदोष व्रत दोनों ही भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। जब ये दोनों व्रत एक ही दिन पड़ते हैं तो भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि पूजा कैसे करें, कौन-सा व्रत रखें और क्या नियम अपनाएं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार और प्रदोष व्रत का संयोग शिव भक्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
क्या दोनों व्रत एक साथ रख सकते हैं?
मान्यताओं के अनुसार, यदि सावन सोमवार और प्रदोष व्रत एक ही दिन पड़ जाएं तो भक्त दोनों का संकल्प ले सकते हैं। अलग-अलग व्रत करने के बजाय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करके दोनों व्रतों का पुण्य प्राप्त करने की मान्यता है।
पूजा का सही समय और विधि
ऐसे शुभ संयोग में भक्तों को सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाकर या घर में शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए।
पूजा में शामिल कर सकते हैं—
भगवान शिव का जलाभिषेक।
बेलपत्र अर्पित करना।
सफेद फूल चढ़ाना।
धूप-दीप जलाना।
शिव मंत्रों का जाप करना।
शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करना।
प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास का समय भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
सात्विक भोजन करें।
मन और वाणी की शुद्धता बनाए रखें।
क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें।
जरूरतमंदों की सहायता करें।
भगवान शिव का स्मरण करते रहें।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने वाला व्रत माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
सावन सोमवार का महत्व
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान सोमवार का व्रत रखने और शिव पूजा करने से भक्तों को मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलने की धार्मिक मान्यता है।
संयोग को माना जाता है विशेष शुभ
सावन सोमवार और प्रदोष व्रत का एक साथ आना शिव भक्तों के लिए विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।
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