धर्म-अध्यात्म

मन्नत पूरी करने वाले चर्च जहां चढ़ाए जाते हैं मोम के पुतले और अनोखे चढ़ावे

nidhi
2 Sept 2026 1:29 PM IST
मन्नत पूरी करने वाले चर्च जहां चढ़ाए जाते हैं मोम के पुतले और अनोखे चढ़ावे
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भारत के इन चर्चों की अनोखी परंपरा मन्नत पूरी होने
धर्म : भारत में आस्था और धार्मिक परंपराओं के कई अनोखे रूप देखने को मिलते हैं। मंदिरों और दरगाहों की तरह कुछ प्रसिद्ध चर्चों में भी श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं और उसके पूरा होने पर खास वस्तुएं अर्पित करते हैं। कहीं शरीर के अंगों के आकार की मोमबत्तियां चढ़ाई जाती हैं तो कहीं बीमारी से ठीक होने के बाद सोने या चांदी से बने अंगों की छोटी प्रतिकृतियां भेंट करने की परंपरा है। इन मान्यताओं के कारण तमिलनाडु का वेलंकन्नी और मुंबई का माउंट मैरी बेसिलिका विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
वेलंकन्नी में सोने-चांदी के अंग चढ़ाने की परंपरा
तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले में स्थित बेसिलिका ऑफ आवर लेडी ऑफ गुड हेल्थ वेलंकन्नी देश के प्रमुख ईसाई तीर्थस्थलों में शामिल है। इसे ‘लूर्डेस ऑफ द ईस्ट’ भी कहा जाता है। यहां ईसाइयों के साथ दूसरे धर्मों के श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
वेलंकन्नी में स्वास्थ्य संबंधी मनोकामनाओं को लेकर एक खास परंपरा प्रचलित है। यदि किसी श्रद्धालु को हृदय, फेफड़े या शरीर के किसी अन्य अंग से जुड़ी बीमारी है तो वह उसी अंग के आकार की मोमबत्ती अर्पित कर प्रार्थना कर सकता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता मरियम उनकी प्रार्थना सुनती हैं।
बीमारी से स्वस्थ होने के बाद कई श्रद्धालु आभार के रूप में ठीक हुए अंग की सोने या चांदी की छोटी प्रतिकृति चर्च को भेंट करते हैं। वेलंकन्नी में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए सोने-चांदी और दूसरी वस्तुओं के चढ़ावे को प्रदर्शित करने वाला संग्रहालय भी है।
माउंट मैरी में मिलते हैं मोम के घर और शरीर के अंग
मुंबई के बांद्रा में स्थित माउंट मैरी बेसिलिका में भी ऐसी ही दिलचस्प परंपरा देखने को मिलती है। यहां लगने वाले बांद्रा मेले के दौरान चर्च के आसपास हाथ, पैर और शरीर के दूसरे अंगों के आकार की मोमबत्तियां और मोम की आकृतियां बिकती हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामना के अनुसार इन्हें खरीदकर अर्पित करते हैं।
यह परंपरा केवल बीमारी से जुड़ी नहीं है। संतान की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु बच्चे या गुड़िया जैसी मोम की आकृति चढ़ाते हैं। नया घर चाहने वाले घर के आकार की और वाहन की इच्छा रखने वाले कार जैसी आकृति अर्पित करते हैं। इन वस्तुओं को मनोकामना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
सभी धर्मों के लोग पहुंचते हैं
इन चर्चों की एक खासियत यह भी है कि यहां आने वाले श्रद्धालु केवल ईसाई समुदाय से नहीं होते। माउंट मैरी में विभिन्न धर्मों के लोग मन्नत और प्रार्थना के लिए पहुंचते हैं। वेलंकन्नी में भी अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के श्रद्धालुओं की मौजूदगी लंबे समय से इसकी पहचान रही है।
वेलंकन्नी में सिर मुंडवाने, समुद्र में स्नान करने और घुटनों के बल प्रार्थना करते हुए आगे बढ़ने जैसी परंपराएं भी देखने को मिलती हैं। ये स्थानीय संस्कृति और धार्मिक आस्था के मेल का उदाहरण हैं।
इन परंपराओं को आस्था और लोकविश्वास के संदर्भ में समझना जरूरी है। बीमारी के इलाज के लिए चिकित्सकीय देखभाल का विकल्प इन्हें नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन श्रद्धालुओं के लिए मोम के पुतले, शरीर के अंगों की आकृतियां और सोने-चांदी की प्रतिकृतियां उनकी प्रार्थना, उम्मीद और मनोकामना पूरी होने के बाद व्यक्त किए जाने वाले आभार का प्रतीक हैं।
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