- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- शारदीय नवरात्रि ...
धर्म-अध्यात्म
शारदीय नवरात्रि घटस्थापना से विजयादशमी तक देखें पूरा शेड्यूल
Ratna Netam
1 Oct 2026 5:56 PM IST

x
धर्म : शारदीय नवरात्रि का पर्व इस साल रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के बाद मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगापंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात करीब 9:19 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर माना जाएगा। इसी दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना यानी घटस्थापना की जाएगी और मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि का शुभारंभ होगा।
दिल्ली के पंचांग के अनुसार घटस्थापना के लिए 11 अक्टूबर को सुबह 6:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक का समय बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। हालांकि पूजा और घटस्थापना का सटीक समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित माना जाता है।शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। इनमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, देवी मंदिरों में दर्शन करते हैं और घरों में दुर्गा सप्तशती, देवी कवच तथा अन्य धार्मिक पाठ करते हैं।
11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसी दिन घटस्थापना होगी। धार्मिक परंपराओं में कलश को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। घर के पूजा स्थल पर कलश स्थापित कर नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना की जाती है। पहला दिन रविवार को पड़ रहा है।
12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
दूसरे दिन सोमवार, 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होगी। मान्यता है कि देवी का यह स्वरूप तप, संयम और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस दिन माता को विशेष भोग अर्पित करते हैं।
13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा की आराधना
नवरात्रि के तीसरे दिन मंगलवार, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा की पूजा होगी। देवी का यह स्वरूप शक्ति और साहस से जुड़ा माना जाता है। मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है।
14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा की पूजा
बुधवार, 14 अक्टूबर को नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता का यह स्वरूप ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की पूजा
गुरुवार, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता की आराधना होगी। नवरात्रि के पांचवें दिन माता के इस स्वरूप की पूजा की जाती है। श्रद्धालु सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
16 अक्टूबर को मां कात्यायनी की पूजा
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी की पूजा होगी। नवरात्रि का छठा दिन देवी कात्यायनी को समर्पित माना जाता है। इस दौरान कई स्थानों पर गरबा, डांडिया और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की आराधना
शनिवार, 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा होगी। इस साल पंचांग में सप्तमी तिथि के विस्तार के कारण नवरात्रि के दिनों की तिथियों में सामान्य वर्षों की तुलना में थोड़ा बदलाव दिखाई देगा। 18 अक्टूबर को भी सप्तमी का प्रभाव रहेगा और अष्टमी तिथि सुबह के बाद शुरू होगी।
19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी के अनुष्ठान
सोमवार, 19 अक्टूबर नवरात्रि में विशेष महत्व का दिन रहेगा। उपलब्ध पंचांग के अनुसार इस दिन दुर्गा अष्टमी से जुड़े प्रमुख अनुष्ठान किए जाएंगे और महानवमी से संबंधित पूजा भी होगी। अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में कन्या पूजन अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है। श्रद्धालु नौ कन्याओं को देवी के स्वरूप में भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेते हैं।
20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा
मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इसी दिन नवरात्रि के पारण और देवी विसर्जन से जुड़े अनुष्ठान भी किए जाएंगे। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि 20 अक्टूबर को प्रभावी रहेगी और इसी दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।दशहरा को बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। देश के कई हिस्सों में इस दिन भगवान राम द्वारा रावण पर विजय की स्मृति में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। वहीं कई क्षेत्रों में इसे मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जोड़ा जाता है।
शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। घरों में अखंड ज्योति जलाई जाती है और नौ दिनों तक सात्विक भोजन करने की परंपरा भी प्रचलित है। अनेक लोग लहसुन-प्याज, मांसाहार और शराब से परहेज करते हुए व्रत और पूजा करते हैं।इस प्रकार वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर विजयादशमी के साथ 20 अक्टूबर को संपन्न होगी। घटस्थापना से लेकर अष्टमी, नवमी और दशहरा तक पूरे दस दिनों के दौरान देशभर में देवी आराधना, पूजा-पाठ, गरबा, डांडिया, कन्या पूजन और धार्मिक आयोजनों की धूम देखने को मिलेगी।
Next Story





