धर्म-अध्यात्म

भाद्रपद अमावस्या पर दान का विशेष महत्व इन 3 चीजों का करें दान

nidhi
11 Sept 2026 11:09 AM IST
भाद्रपद अमावस्या पर दान का विशेष महत्व इन 3 चीजों का करें दान
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भाद्रपद अमावस्या
Bhadrapada Amavasya: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इनमें भाद्रपद अमावस्या को पितरों के तर्पण, श्राद्ध, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पितरों को जल अर्पित करने और जरूरतमंदों को दान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
भाद्रपद अमावस्या के दिन लोग सुबह स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करते हैं। इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण और दान किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन विशेष रूप से तीन चीजों का दान शुभ माना जाता है।
1. काले तिल का दान
अमावस्या पर काले तिल का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक परंपराओं में तर्पण के दौरान भी तिल का इस्तेमाल किया जाता है। मान्यता है कि पितरों के नाम से काले तिल का दान करने से उन्हें तृप्ति मिलती है और पितृ दोष से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं।
इस दिन काले तिल किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को दान किए जा सकते हैं। तर्पण करते समय भी जल में काले तिल डालकर पितरों को अर्पित करने की परंपरा है।
2. अन्न का दान
भाद्रपद अमावस्या पर अन्नदान को भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। अपनी क्षमता के अनुसार चावल, गेहूं, दाल या अन्य खाद्य सामग्री जरूरतमंदों को दी जा सकती है। धार्मिक मान्यता है कि पितरों के नाम से किया गया अन्नदान परिवार में सुख-समृद्धि और शांति लाता है।
कई परिवार इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन भी कराते हैं। दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सेवा की भावना रखने को महत्वपूर्ण माना गया है।
3. वस्त्र का दान
इस अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को वस्त्र दान करने की भी परंपरा है। साफ और उपयोग योग्य कपड़े किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दिए जा सकते हैं। मान्यता है कि पूर्वजों के निमित्त वस्त्र दान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
दान में नई वस्तुएं देना बेहतर माना जाता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दी जाने वाली वस्तु सम्मानपूर्वक और उपयोग योग्य हो।
पितरों के लिए करें तर्पण
भाद्रपद अमावस्या की सुबह स्नान के बाद पितरों का स्मरण कर तर्पण किया जा सकता है। कई परंपराओं में पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने और जरूरतमंदों को भोजन कराने का भी विधान बताया गया है।
ध्यान रहे कि अमावस्या से जुड़ी पूजा और दान की विधियां अलग-अलग क्षेत्रों, परिवारों और संप्रदायों में भिन्न हो सकती हैं। ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। परिवार में विशेष श्राद्ध या तर्पण परंपरा होने पर स्थानीय विद्वान या पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार विधि करना उचित माना जाता है।
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