धर्म-अध्यात्म

रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, जीवन में आएगी सुख- समृद्धि

Subhi
19 May 2022 6:27 AM GMT
रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, जीवन में आएगी सुख- समृद्धि
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हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि प्रतिदिन सुबह-शाम ईश्वर की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में हमेशा सुख शांति बनी रहती है।

हिंदू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि प्रतिदिन सुबह-शाम ईश्वर की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही घर में हमेशा सुख शांति बनी रहती है। सुबह उठकर पूजा और ईश्वर की प्रार्थना करने से पूरा दिन अच्छा बीतता है और सभी कार्य सफल होते हैं। सुबह के अलावा शाम को भी पूजा की जाती है। वहीं जीवन में सकारात्मक उर्जा बनाए रखने के लिए माना जाता है कि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना और रात को जल्दी सोना चाहिए। इसके अलावा सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हमारे द्वारा किए जाने वाले कार्यों का भी हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है। यदि आप अपने दिन को शुभ बनाना चाहते हैं तो सुबह पूजा के अलावा दिन भर कुछ मंत्रो का भी जाप करना चाहिए। दिन भर इन मंत्रों के जाप से जीवन की नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। तो आइए जानते हैं कौन से हैं वे मंत्र...

मान्यता है कि मनुष्य की हथेलियों में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती का वास होता है। इसलिए सुबह उठते ही अपनी हथेलियों को देखें और नीचे दिए गए मंत्र का जाप करें...

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम॥

नहाने से शरीर की सफाई तो होती है। साथ ही नकारात्मकता भी दूर होती है। ऐसे में नहाते समय नीचे दिए मंत्र का जाप करें और साथ ही पवित्र नदियों तथा तीर्थों का ध्यान करें।

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु॥

स्नान आदि से निवृत्त होकर तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य देव को अर्पित करें। साथ ही इस दौरान नीचे दिए मंत्र का कम से कम 11 बार जप करें। सूर्य देव की कृपा से आपके कार्य सफल होंगे और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

ऊं सूर्याय नम:।

इसके अलावा भोजन करने से पहले आपको अन्न प्रदान करने के लिए ईश्वर के प्रति धन्यवाद जताने के लिए नीचे दिए मंत्र का जाप करना चाहिए।

ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।

तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै।। ऊं शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।


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