धर्म-अध्यात्म

भगवान शिव की कृपा पाने को कल जपें ये 5 मंत्र

Ratna Netam
10 Aug 2026 9:43 PM IST
भगवान शिव की कृपा पाने को कल जपें ये 5 मंत्र
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धर्म : सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं और जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पण तथा मंत्र जाप के माध्यम से शिव की आराधना करते हैं। सावन में पड़ने वाली शिवरात्रि का महत्व भी विशेष माना जाता है। साल 2026 में सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की पूजा करने और श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करने से भक्त को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बहुत अधिक आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। सच्ची श्रद्धा और साफ मन से की गई पूजा को ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन शिवरात्रि के दिन भक्त सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेते हैं और शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कई लोग घर पर भी शिवलिंग की पूजा करते हैं। इस दौरान कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है।
सबसे पहले पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप किया जाता है। इसे भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध मंत्रों में से एक माना जाता है। सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करते हुए इस मंत्र का जाप किया जा सकता है। पूजा के दौरान बेलपत्र भी अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, 'ॐ नमः शिवाय' का श्रद्धापूर्वक जाप मन को एकाग्र करने और मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। भक्त इस मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार कर सकते हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण मंत्र रुद्र मंत्र है। शिवलिंग का अभिषेक करते समय 'ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः' मंत्र का जाप करने की परंपरा है। भगवान शिव के रुद्र स्वरूप की आराधना में इस मंत्र का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में रुद्राभिषेक और रुद्र मंत्र का जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। भक्त जलाभिषेक करते समय शांत मन से इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
तीसरा मंत्र महामृत्युंजय मंत्र है। भगवान शिव को समर्पित इस मंत्र का धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान है। मंत्र है, 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।' सावन शिवरात्रि के दिन शिव पूजा और अभिषेक के दौरान इसका जाप किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महामृत्युंजय मंत्र का जाप भय और नकारात्मकता को दूर करने तथा मानसिक मजबूती के लिए किया जाता है। स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के दौरान भी लोग आस्था के साथ इस मंत्र का जाप करते हैं, हालांकि इसे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
चौथा मंत्र शिव गायत्री मंत्र है। जलाभिषेक करते समय 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्' का जाप किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव गायत्री मंत्र का जाप मन को शुद्ध करने और ध्यान को एकाग्र करने में सहायक माना जाता है। भक्त सावन शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।
पांचवां मंत्र रुद्राष्टक है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रुद्राष्टक भगवान शिव की स्तुति का प्रसिद्ध स्तोत्र है। सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय इसका पाठ करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्राष्टक का पाठ मन में भक्ति भाव बढ़ाता है और मानसिक शांति का अनुभव कराने वाला माना जाता है।
सावन शिवरात्रि के दिन इन मंत्रों का जाप करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और एकाग्रता मानी जाती है। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक मंत्र का जाप भी कर सकते हैं या पूजा के दौरान अलग-अलग मंत्रों का पाठ कर सकते हैं। पूजा में जल, बेलपत्र और अन्य सामग्री अर्पित करते समय स्थानीय परंपराओं और अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष दिन है। ऐसे में भक्त इस अवसर पर भगवान भोलेनाथ का ध्यान कर सकते हैं और अपने परिवार की सुख-शांति की कामना कर सकते हैं। आस्था के अनुसार की गई पूजा और मंत्र जाप भक्त के मन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक शांति का भाव पैदा कर सकता है।
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