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धर्म-अध्यात्म
"शारदीय नवरात्र के पहले दिन बन रहा है ब्रह्म योग, बरसेगी मां दुर्गा की विशेष कृपा"
Harrison
21 Sept 2025 9:14 PM IST

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spiritual अध्यात्मिक : ब्रह्म योग को सर्वश्रेष्ठ और दिव्य योग माना जाता है। यह योग ज्ञान, आध्यात्मिकता और उच्च उद्देश्य वाले कार्यों के लिए शुभ होता है। ब्रह्म योग में की गई साधना या उपासना व्यक्ति के मन, बुद्धि और आत्मा को मजबूत करती है। इस योग में किए गए कर्म या पूजा से व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और देवी-देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन बना ब्रह्म योग, साधना से मिलेगा आत्मबल और मानसिक शांति
शारदीय नवरात्रि 2025 का शुभारंभ सोमवार, 22 सितंबर से हो रहा है और इस वर्ष का प्रारंभ एक अत्यंत शुभ योग — ‘ब्रह्म योग’ के साथ हो रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ब्रह्म योग को सर्वश्रेष्ठ और दिव्य योग माना गया है। यह योग किसी भी आध्यात्मिक, धार्मिक और मानसिक साधना के लिए बेहद फलदायी होता है।
क्या है ब्रह्म योग और क्यों होता है शुभ?
ब्रह्म योग तब बनता है जब चंद्रमा और बृहस्पति ग्रह विशेष स्थिति में होते हैं। यह योग व्यक्ति की बुद्धि, आत्मा और मानसिक शक्ति को प्रबल बनाता है। ब्रह्म योग में की गई पूजा, ध्यान और साधना विशेष फलदायक होती है और व्यक्ति को दिव्य अनुभव, शांति, आत्मविश्वास और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
ब्रह्म योग का प्रभाव:
इस योग में की गई मां दुर्गा की उपासना विशेष फल देती है।
साधक की मनःशक्ति और एकाग्रता बढ़ती है।
सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेज होता है।
मानसिक तनाव, डर और असमंजस दूर होते हैं।
आध्यात्मिक उन्नति का द्वार खुलता है।
शारदीय नवरात्र में ब्रह्म योग का महत्व
इस बार नवरात्रि के पहले ही दिन यह योग बनने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह समय:
संकल्प लेने के लिए श्रेष्ठ है
घटस्थापना और दुर्गा पूजा के लिए अत्यंत शुभ है
नवदुर्गा की आराधना से मानसिक और आत्मिक शुद्धि होती है
साधना से भविष्य के कार्यों में सफलता मिलती है
क्या करें ब्रह्म योग में?
कलश स्थापना शुभ मुहूर्त में करें
मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की विधिपूर्वक पूजा करें
दिन की शुरुआत ध्यान, मंत्र जाप और प्रार्थना से करें
संकल्प लें — जैसे कि 9 दिन उपवास, सेवा, संयम, आदि
जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें, विशेषकर कन्याओं को भोजन कराना शुभ माना गया है
निष्कर्ष:
इस वर्ष शारदीय नवरात्र का शुभारंभ अत्यंत दुर्लभ और फलदायी ब्रह्म योग के संयोग से हो रहा है। यह साधकों और श्रद्धालुओं के लिए एक स्वर्णिम अवसर है जब वे अपने जीवन में आध्यात्मिक उत्थान, मानसिक शांति और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। जो भी व्यक्ति इस पावन अवसर का लाभ लेकर श्रद्धा व निष्ठा से साधना करेगा, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य आएगा।
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