धर्म-अध्यात्म

रविवार को भानु सप्तमी और गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन, उपासकों के लिए बेहद खास

jantaserishta.com
24 Jan 2026 8:53 AM IST
रविवार को भानु सप्तमी और गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन, उपासकों के लिए बेहद खास
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नई दिल्ली: माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन के साथ ही इस दिन सूर्य देव की आराधना को समर्पित भानु सप्तमी की विशेष तिथि भी पड़ रही है, जो सूर्य और देवी उपासकों के लिए बेहद खास है।
25 जनवरी को भानु सप्तमी का पर्व है। यह दिन सूर्य देव की विशेष आराधना का है, जब रविवार और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का संयोग बनता है तो उसे भानु सप्तमी या रवि सप्तमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा-पाठ विशेष तौर पर फलित होती है और सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और करियर में उन्नति मिलती है। साथ ही शारीरिक-मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
रविवार को गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन भी है। गुप्त नवरात्रि माघ मास में शुक्ल पक्ष में शुरू होती है, जिसमें देवी की गुप्त साधना की जाती है। यह नवरात्रि तंत्र-मंत्र साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है। रविवार को भानु सप्तमी पड़ने से यह दिन और भी पुण्यकारी हो गया है।
भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने, लाल चंदन, रोली, लाल फूल, गुड़, चावल और जल से पूजा करने का विधान है। इसके साथ ही साधक को ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः, घृणि सूर्याय नम:, सूर्य देवताभ्याम नम: मंत्र का का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए। पूजा के बाद अपनी क्षमता अनुसार दान जैसे गुड़, गेहूं, लाल वस्त्र या तांबे का दान करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव की भक्ति से जातक को नया ऊर्जा मिलती है। करियर में प्रगति होती है, रोगों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। गुप्त नवरात्रि के दिन देवी साधना के साथ सूर्य पूजा करने से दोहरी शक्ति मिलती है।
दृक पंचांग के अनुसार, रविवार को शुक्ल सप्तमी तिथि रात 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। रेवती नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक है, उसके बाद अश्विनी शुरू होगा। चंद्रमा मीन राशि में संचार करेंगे। वहीं, सूर्योदय 7 बजकर 13 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 54 मिनट पर होगा।
किसी भी शुभ या नए कार्य से पहले मुहूर्त का विचार महत्वपूर्ण है। रविवार को राहुकाल दोपहर 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें। अन्य अशुभ समय जैसे यमगंड दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से 1 बजकर 54 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 14 मिनट से 4 बजकर 34 मिनट तक है।
पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 19 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक है।
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