धर्म-अध्यात्म

मलमास में तुलसी पूजा के फायदे और उपाय, बढ़ाएँ सुख-समृद्धि

nidhi
16 May 2026 11:35 AM IST
मलमास में तुलसी पूजा के फायदे और उपाय, बढ़ाएँ सुख-समृद्धि
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मलमास में तुलसी पूजा का महत्व
देवघरः हिंदू धर्म में मलमास को बेहद पवित्र और पुण्य फल देने वाला महीना माना जाता है. इसे अधिकमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान पूजा-पाठ, दान-पुण्य, मंत्र जाप और भक्ति का विशेष महत्व बताया गया है. साल 2026 में मलमास की शुरुआत 16 मई की रात से हो रही है और यह 15 जून तक रहेगा. इस पूरे महीने में मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए कार्यों की शुरुआत नहीं की जाती, लेकिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है. धार्मिक ग्रंथों में भी कहा गया है कि इस महीने में किया गया जप-तप और दान कई गुना फल देता है.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुद्गल के अनुसार मलमास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है क्योंकि तुलसी को भगवान विष्णु की सबसे प्रिय माना गया है. मान्यता है कि जिस घर में प्रतिदिन तुलसी की पूजा होती है वहां नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. उन्होंने बताया कि मलमास के दौरान हर सुबह स्नान के बाद तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना चाहिए और शाम के समय घी का दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही घर में आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं और रुके हुए कामों में भी सफलता मिलने लगती है.
माता तुलसी के साथ करें शालीग्राम की पूजा
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक मलमास में तुलसी के साथ शालिग्राम भगवान की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शालिग्राम भगवान विष्णु का स्वरूप माने जाते हैं. यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन तुलसी दल अर्पित कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करता है तो उसके जीवन के कई कष्ट दूर हो सकते हैं. इतना ही नहीं, ग्रह दोष, पितृ दोष और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में भी राहत मिलने की बात कही जाती है. इस दौरान जरूरतमंदों को भोजन कराना, गरीबों को वस्त्र दान करना और धार्मिक पुस्तकों का पाठ करना भी पुण्यदायी माना गया है. माना जाता है कि पुरुषोत्तम मास में किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कार्य भी बड़ा फल देते हैं.
सूखने ना दें तुलसी का पौधा
धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि मलमास के दौरान तुलसी के पौधे को कभी सूखने नहीं देना चाहिए और न ही उसके आसपास गंदगी रखनी चाहिए. तुलसी के पत्तों को बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए और रविवार या एकादशी के दिन तुलसी दल तोड़ने से बचना चाहिए. कई लोग इस महीने में तुलसी के सामने बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और घर में नियमित रूप से भजन-कीर्तन भी करवाते हैं. इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है. ज्योतिष शास्त्र में यह भी माना जाता है कि मलमास के दौरान किए गए आध्यात्मिक उपाय व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास लेकर आते हैं.
तामसिक भोजन ना करें ग्रहण
मलमास को केवल धार्मिक नियमों का महीना नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और भक्ति का अवसर भी माना जाता है. इस दौरान लोग अपनी दिनचर्या में संयम रखते हैं, सात्विक भोजन करते हैं और ज्यादा से ज्यादा समय पूजा-पाठ में बिताने की कोशिश करते हैं. मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे श्रद्धा भाव से पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी माता की आराधना करता है, उसके जीवन में आने वाली परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. यही कारण है कि देशभर में मलमास को भक्ति, साधना और पुण्य कमाने का सबसे खास समय माना जाता है.
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