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धर्म-अध्यात्म
नए साल की शुरुआत: Guru Pradosh व्रत से होगी सुख-समृद्धि की कामना
Harrison
30 Dec 2025 7:40 PM IST

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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : नए साल की शुरुआत इस बार पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से हो रही है, जिसे विशेष धार्मिक महत्व के साथ गुरु प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व है। पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व इस बात में है कि यह व्रत विशेष रूप से गुरु (बृहस्पति) और प्रदोष (चतुर्दशी के पूर्व दिन) के योग से जुड़ा हुआ है। इस दिन सुबह से ही श्रद्धालु व्रत रखते हैं और संध्या के समय भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। पूजा के दौरान बेलपत्र, दूध, धतूरा, फूल और रोली का प्रयोग किया जाता है। साथ ही, शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करने की परंपरा है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गुरु प्रदोष व्रत के दिन शिव दरिद्रता नाशक स्तोत्र और दरिद्र दहन स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में दरिद्रता और दुखों से मुक्ति मिलती है। ये स्तोत्र विशेष रूप से गरीबों और जरूरतमंदों के कल्याण, आर्थिक स्थिरता और परिवार में सुख-शांति लाने के लिए प्रभावी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए व्रत और स्तोत्र पाठ से भगवान शिव की कृपा सीधे जीवन पर पड़ती है।
व्रत रखने वाले भक्त सुबह के समय हल्का उपवास रखते हैं और दिन भर ध्यान और पूजा में व्यस्त रहते हैं। शाम को संध्या समय पर भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजन विधि पूरी की जाती है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
गुरु प्रदोष व्रत का लाभ न केवल आर्थिक और भौतिक सुख के लिए है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन की पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास और संकल्प शक्ति बढ़ती है।
मुख्य बिंदु:
नए साल की शुरुआत पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से
गुरु प्रदोष व्रत विशेष धार्मिक महत्व रखता है
भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
शिव दरिद्रता नाशक स्तोत्र और दरिद्र दहन स्तोत्र का पाठ लाभकारी
व्रत और पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास
गुरु प्रदोष व्रत के दौरान भक्त विशेष सत्कार्य और दान करने पर भी जोर देते हैं। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया दान भी जीवन में दरिद्रता और कठिनाइयों को दूर करने में सहायक होता है।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि इस व्रत के दिन पूरे परिवार के साथ पूजा करना और स्तोत्र पाठ करना विशेष फलदायी होता है। परिवार में सुख-शांति, धन-संपत्ति और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। साथ ही, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
गुरु प्रदोष व्रत का पालन हर व्यक्ति अपनी क्षमता और सुविधा के अनुसार कर सकता है। कुछ लोग पूर्ण उपवास रखते हैं, तो कुछ हल्का उपवास और विशेष पूजा कर इस दिन का महत्व बढ़ाते हैं। सभी मामलों में उद्देश्य यही है कि भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त हो और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे।
नए साल की शुरुआत गुरु प्रदोष व्रत के साथ करने से न केवल धार्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि यह जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा भी प्रदान करता है। इस दिन का सही पालन करने से व्यक्ति अपने जीवन में मानसिक, आध्यात्मिक और भौतिक समृद्धि का अनुभव कर सकता है।
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