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धर्म-अध्यात्म
धनतेरस पर जरूर पढ़ें माता लक्ष्मी की यह कथा, एक गलती ने बदल दी पूरी कहानी
Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 7:07 PM IST

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Dhanteras 2026: हिंदू धर्म में दीपावली का पर्व विशेष महत्व रखता है। पांच दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण इस तिथि को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।धनतेरस को धन, समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, दीप जलाते हैं और भगवान से परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना भी इस पर्व की प्रमुख परंपराओं में शामिल है।
धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। समुद्र मंथन के दौरान अनेक दिव्य वस्तुएं और रत्न प्रकट हुए। इसी क्रम में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार और आयुर्वेद का देवता माना जाता है। उनकी पूजा अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगों से रक्षा की कामना के साथ की जाती है।धनतेरस का धार्मिक संदेश केवल धन-संपत्ति प्राप्त करने तक सीमित नहीं है। यह पर्व बताता है कि स्वस्थ शरीर और निरोगी जीवन भी मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति है।इसी कारण धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है।
धनतेरस पर माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का महत्व
धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है।धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस अवसर पर भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है, जिन्हें धन का देवता और देवताओं का कोषाध्यक्ष माना गया है।
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा है। लोग अपने घरों को दीपों और रंगोली से सजाते हैं।मान्यता है कि स्वच्छ और प्रकाशमय घर में माता लक्ष्मी का स्वागत करना शुभ माना जाता है। हालांकि, धार्मिक दृष्टि से इस पर्व का उद्देश्य केवल धन की कामना करना नहीं, बल्कि परिश्रम, संतोष और सदाचार के महत्व को समझना भी है।
धनतेरस से जुड़ी राजा हिम की प्रसिद्ध कथा
धनतेरस से एक लोकप्रिय पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार, प्राचीन समय में राजा हिम नामक एक राजा थे। उनके पुत्र की कुंडली देखकर ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह के चौथे दिन उसकी मृत्यु सर्पदंश से हो जाएगी।इस भविष्यवाणी को सुनकर परिवार चिंतित हो गया। विवाह के बाद जब चौथी रात आई, तो राजकुमार की पत्नी ने अपने पति को सोने नहीं दिया।उसने घर के मुख्य द्वार पर सोने-चांदी के आभूषण और सिक्के रख दिए। इसके अलावा कई दीपक जलाकर पूरे स्थान को रोशनी से भर दिया।राजकुमारी अपने पति को रातभर कहानियां सुनाती रही और गीत गाती रही, ताकि उसे नींद न आए।कथा के अनुसार, निर्धारित समय पर यमराज सर्प का रूप धारण करके वहां पहुंचे। लेकिन द्वार पर रखे आभूषणों की चमक और दीपकों के प्रकाश से वे आगे नहीं बढ़ सके।वे वहीं रुक गए और पूरी रात राजकुमारी की कहानियां तथा गीत सुनते रहे। सुबह होने पर वे वापस लौट गए और राजकुमार की जान बच गई।इसी कथा से धनतेरस पर दीपदान करने की परंपरा को जोड़ा जाता है। यह एक धार्मिक लोककथा है, जिसका उद्देश्य दीपदान और परिवार की मंगलकामना का महत्व समझाना है।
धनतेरस पर क्यों खरीदे जाते हैं सोना, चांदी और बर्तन?
धनतेरस के दिन नई वस्तुओं की खरीदारी को शुभ माना जाता है। विशेष रूप से सोना, चांदी और धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।कई परिवार इस अवसर पर पीतल, तांबा, स्टील और चांदी के बर्तन खरीदते हैं। वहीं, कुछ लोग सोने-चांदी के आभूषण या सिक्के खरीदते हैं।हालांकि, धनतेरस पर महंगी वस्तु खरीदना धार्मिक रूप से अनिवार्य नहीं है। श्रद्धालु अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दीपक, बर्तन या दैनिक उपयोग की कोई वस्तु खरीदकर भी पर्व मना सकते हैं।
धनतेरस पर यम दीपदान का विशेष महत्व
धनतेरस की शाम यम दीपदान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यमराज के निमित्त दीपक जलाया जाता है।कई क्षेत्रों में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखने की परंपरा है। यह दीपक परिवार के सदस्यों की दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना का प्रतीक माना जाता है।यम दीपदान की परंपरा राजा हिम के पुत्र से जुड़ी कथा से भी संबंधित है।
धनतेरस पर कैसे करें पूजा?
धनतेरस के दिन सुबह स्नान करने के बाद घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई की जाती है। शाम के समय पूजा स्थान पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है।इसके बाद दीपक जलाकर पुष्प, अक्षत, रोली, धूप और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु माता लक्ष्मी से सुख-समृद्धि और भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।पूजा के बाद परिवार के सदस्य मिलकर दीप जलाते हैं और घर को रोशनी से सजाते हैं।
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