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धर्म-अध्यात्म
Kharmas में टालें मांगलिक काम, करें शुभ कार्यों पर ध्यान
Harrison
14 Dec 2025 7:18 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : भारतीय संस्कृति में समय और माहौल का विशेष महत्व माना गया है। हर काम के लिए शुभ मुहूर्त और समय निर्धारित किए गए हैं, ताकि परिणाम सकारात्मक और फलदायक हों। इसी कड़ी में ‘खरमास’ या ‘अश्विन मास के अंतिम 16 दिनों का अवधि’ को विशेष रूप से माना जाता है। यह समय ग्रहों की स्थिति के कारण माना जाता है कि मांगलिक कार्य जैसे शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण या किसी धार्मिक अनुष्ठान को करने के लिए शुभ नहीं होता।
खरमास क्या है?
खरमास का अर्थ है ‘खर मास’ यानी अश्विन मास का वह हिस्सा जब आषाढ़ और आश्विन के बीच चंद्रमा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह अवधि तय की जाती है। इसे ‘अशुभ माह’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस समय मंगल, बृहस्पति और अन्य ग्रहों की स्थिति मांगलिक कामों के लिए अनुकूल नहीं होती।
खरमास में किन कामों से बचना चाहिए
सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में निम्नलिखित काम टालना चाहिए:
शादी और सगाई – विवाह और सगाई जैसी मांगलिक रस्में इस समय करने से अशुभ परिणाम ला सकती हैं। माना जाता है कि शादीशुदा जीवन में बाधाएं या अनबन हो सकती है।
गृह प्रवेश – नए घर में प्रवेश या नया मकान खरीदना भी इस समय अनुकूल नहीं माना जाता। ऐसा करने से घर में शांति और सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है।
मांगलिक अनुष्ठान – किसी भी मांगलिक पूजा या संस्कार जैसे मुंडन, नामकरण या अन्नप्राशन इस अवधि में नहीं करने चाहिए।
व्यावसायिक शुभारंभ – नए व्यवसाय या व्यापार की शुरुआत करने के लिए यह समय अनुकूल नहीं है।
खरमास में किए जाने वाले शुभ काम
हालांकि इस अवधि में मांगलिक काम टालने की सलाह दी जाती है, लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जो करना लाभकारी और शुभ माना जाता है:
धार्मिक अनुष्ठान और पूजा – मंदिर दर्शन, हवन, पाठ या किसी धर्मग्रंथ का पाठ करना लाभकारी होता है।
दान और सेवा कार्य – गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना, सामाजिक सेवा करना इस समय अत्यंत शुभ माना जाता है।
स्वाध्याय और ध्यान – इस अवधि में ध्यान, योग और स्वाध्याय करना मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए उत्तम होता है।
अन्न और फल वितरण – किसी धार्मिक अवसर पर अन्न और फल वितरण करना पुण्य का काम माना जाता है।
विज्ञान और परंपरा का दृष्टिकोण
वास्तविकता यह है कि यह समय ग्रहों और चंद्रमा की स्थिति पर आधारित है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से कोई प्रमाणित असर नहीं है, परंपराओं ने सदियों से यह नियम बनाए हैं। लोग मानते हैं कि इस समय मांगलिक कार्य टालने से मानसिक शांति मिलती है और काम में सफलता का भाव बढ़ता है।
खरमास का महत्व केवल धार्मिक या आध्यात्मिक नहीं, बल्कि मानसिक तैयारी और सावधानी का भी है। मांगलिक कार्य इस अवधि में टालकर व्यक्ति न केवल परंपराओं का सम्मान करता है, बल्कि अपने कार्यों के बेहतर परिणाम की संभावनाओं को भी बढ़ाता है। वहीं, दान, पूजा और ध्यान जैसे शुभ कार्यों से इस समय को सकारात्मक ऊर्जा से भरा जा सकता है। इसलिए, खरमास में बुद्धिमानी से कार्य करना और शुभ-अशुभ का ज्ञान रखना आवश्यक है।
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