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धर्म-अध्यात्म
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 06:35 बजे से रात 08:52 बजे तक
Tara Tandi
2 Sept 2026 5:42 PM IST

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ज्योतिष न्यूज़ : सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करने का विधान है। इस बार व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है, जिसे धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा और शुभ कार्यों से मनोकामना पूर्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं। शिव आराधना के लिए इस दिन करीब 2 घंटे 18 मिनट का शुभ समय मिलेगा। आइए जानते हैं सितंबर में पड़ने वाले भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा।
भौम प्रदोष व्रत 2026 कब है?
दृक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर को दोपहर 2:42 बजे आरंभ होगी और 9 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे समाप्त होगी। प्रदोष काल 8 सितंबर को पड़ने के कारण इसी दिन भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
भौम प्रदोष व्रत 2026 पूजा मुहूर्त
8 सितंबर को भगवान शिव की पूजा के लिए शाम 6:35 बजे से रात 8:52 बजे तक का समय शुभ रहेगा। यानी भक्तों को शिव पूजा के लिए लगभग 2 घंटे 18 मिनट का समय प्राप्त होगा। इस अवधि में भगवान शिव का जल, दूध, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री से विधिवत अभिषेक कर सकते हैं।
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:31 बजे से 5:17 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक है। रात में निशिता काल 11:56 बजे से 9 सितंबर को 12:42 बजे तक रहेगा।
3 शुभ योग में रखा जाएगा भौम प्रदोष व्रत
इस बार प्रदोष व्रत पर एक साथ तीन शुभ योग बन रहे हैं। इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग, परिघ योग और शिव योग शामिल हैं। परिघ योग सुबह से लेकर रात 12:40 बजे तक रहेगा। इसके बाद शिव योग शुरू होगा।
वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग 8 सितंबर को शाम 4:39 बजे से प्रारंभ होकर 9 सितंबर की सुबह 6:03 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। प्रदोष व्रत के दिन पुष्य नक्षत्र सुबह से शाम 4:39 बजे तक रहेगा। इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र का आरंभ होगा।
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत और शिव आराधना से जीवन के संकट, परेशानियां और नकारात्मक प्रभाव दूर करने में सहायता मिलती है। भक्त सुख-शांति, समृद्धि, धन और संपत्ति की कामना से भी यह व्रत रखते हैं।
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