धर्म-अध्यात्म

अधिक मास का शुभ आगमन, अधिक पूर्णिमा को बताया गया पवित्र तिथि

Kavita2
28 May 2026 4:58 PM IST
अधिक मास का शुभ आगमन, अधिक पूर्णिमा को बताया गया पवित्र तिथि
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Religion Desk धर्म डेस्क : हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष तीन साल बाद अधिक मास का पावन आगमन हुआ है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस विशेष समय में आने वाली अधिक पूर्णिमा को अत्यंत दुर्लभ और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार अधिक मास को सामान्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है, बल्कि इसे आत्म-शुद्धि, भक्ति और साधना का समय माना गया है। इस दौरान लोग अधिकतर पूजा-पाठ, मंत्र जप, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास हर तीन साल के अंतराल में आता है और इसे सामान्य महीनों से अलग माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित महीना बताया गया है, जिसमें सांसारिक कार्यों की बजाय आध्यात्मिक साधना को प्राथमिकता दी जाती है।

इस अवधि में कई पारंपरिक कार्यों पर रोक मानी जाती है। मान्यता है कि अधिक मास में नए व्यापार की शुरुआत, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। इन कार्यों को शुभ फलदायक नहीं माना जाता।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह समय भौतिक उपलब्धियों की बजाय आध्यात्मिक उन्नति के लिए समर्पित होता है। इसलिए लोगों को इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना इस अवधि में विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु इस दौरान दान, सेवा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पुण्य अर्जित करने का प्रयास करते हैं।

मान्यताओं के अनुसार अधिक मास का उद्देश्य जीवन में संतुलन और आत्मिक शुद्धि लाना है। इसलिए इस समय को सांसारिक गतिविधियों से दूर रहकर ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

धार्मिक आयोजनों में यह भी कहा जाता है कि अधिक पूर्णिमा के दिन की गई पूजा और दान विशेष फल देता है। लोग इस दिन उपवास रखते हैं और मंदिरों में जाकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

अधिक पूर्णिमा को अत्यंत शुभ और दुर्लभ अवसर माना गया है, जिसमें श्रद्धालु भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं।

फिलहाल पूरे देश में इस पावन महीने को लेकर धार्मिक माहौल देखा जा रहा है और मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ रही है। लोग इस अवधि को आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य अर्जन का महत्वपूर्ण अवसर मान रहे हैं।

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