- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- नवरात्रि 2026 में एक...
धर्म-अध्यात्म
नवरात्रि 2026 में एक ही दिन अष्टमी-नवमी, जानें कन्या पूजन विधि
nidhi
10 Oct 2026 8:57 AM IST

x
कन्या पूजन में क्या दें गिफ्ट?
धर्म डेस्क: शारदीय नवरात्रि 2026 में दुर्गा अष्टमी और महानवमी का पर्व 19 अक्टूबर, सोमवार को एक ही दिन पड़ रहा है। ऐसे में श्रद्धालु इसी दिन कन्या पूजन, भोजन और उपहार देने की तैयारी कर रहे हैं। हिंदू धार्मिक परंपरा में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के स्वरूप के रूप में पूजने की मान्यता है। कन्या पूजन के दौरान भोजन, दक्षिणा और उपयोगी उपहार दिए जाते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में राशि के अनुरूप उपहार देना शुभ माना जाता है। हालांकि, ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि किसी खास राशि के अनुसार उपहार देने से गृह दोष निश्चित रूप से दूर हो जाते हैं। इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए।
19 अक्टूबर को मनाई जाएगी अष्टमी और नवमी
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। पंचांग के अनुसार, 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान एक ही दिन किए जाएंगे। इसी वजह से कन्या पूजन को लेकर इस दिन विशेष महत्व रहेगा। हालांकि, अष्टमी और नवमी की पूजा का सटीक समय स्थानीय पंचांग तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।
राशि के अनुसार कन्याओं को क्या दें उपहार?
ज्योतिषीय परंपराओं में राशि और उससे जुड़े प्रतीकात्मक रंगों या वस्तुओं को ध्यान में रखकर उपहार चुनने की सलाह दी जाती है। कन्या पूजन में उपहार महंगा होना जरूरी नहीं है। बच्चों की उम्र और जरूरत के हिसाब से उपयोगी वस्तु देना अच्छा विकल्प हो सकता है।
राशि उपहार का सुझाव
मेष लाल रंग की स्टेशनरी या पेंसिल बॉक्स
वृषभ छोटी पर्स या पानी की बोतल
मिथुन कहानी की किताब या स्टेशनरी सेट
कर्क टिफिन बॉक्स या सॉफ्ट टॉय
सिंह रंगीन आर्ट किट
कन्या किताब या उपयोगी स्कूल सामग्री
तुला रंगीन चूड़ियां या हेयर एक्सेसरीज
वृश्चिक ड्राइंग बुक और रंग
धनु ज्ञानवर्धक पुस्तक
मकर गुल्लक
कुंभ क्राफ्ट या एक्टिविटी किट
मीन रंग भरने की किताब या कहानी की पुस्तक
ये उपहार व्यावहारिक सुझाव हैं, किसी निश्चित धार्मिक नियम का हिस्सा नहीं। राशि के अनुसार उपहारों की सूचियां ज्योतिषाचार्यों के बीच अलग-अलग हो सकती हैं।
कन्या पूजन की सही विधि
नवरात्रि की अष्टमी या नवमी के दिन सुबह स्नान करके पूजा स्थल को साफ करें। मां दुर्गा की पूजा के बाद कन्याओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें। पारंपरिक रूप से दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को भोजन कराने की प्रथा प्रचलित है। कुछ परिवारों में एक बालक को भी साथ बैठाने की परंपरा है। कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आसन पर बैठाया जाता है। इसके बाद हलवा, पूरी और चने जैसे पारंपरिक भोजन का प्रसाद दिया जाता है। भोजन के बाद दक्षिणा और उपहार देकर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है। इन सभी कार्यों में बच्चों की सहमति, सुविधा और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।
क्या कन्या पूजन से गृह दोष दूर होते हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्या पूजन से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति की कामना की जाती है। कई श्रद्धालु इसे परिवार की समृद्धि और मंगल के लिए शुभ अनुष्ठान मानते हैं। राशि विशेष का उपहार देने से गृह दोष निश्चित रूप से समाप्त होने का दावा प्रमाणित नहीं है। पूजा का उद्देश्य श्रद्धा, सेवा और जरूरतमंदों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाना भी है। इसलिए उपहार देते समय राशि से अधिक बच्चों की जरूरतों और प्रसन्नता को प्राथमिकता देना उचित है।
Next Story





